केंद्र सरकार का बड़ा तोहफा! कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 7 मई से लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों कर्मचारियों और कामगारों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य पहल की शुरुआत की है। पीएम मोदी के 'श्रमेव जयते' विजन को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 40 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए मुफ्त वार्षिक हेल्थ चेकअप अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इस योजना का उद्देश्य कामगारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान सुनिश्चित करना है

7 मई से होगी शुरुआत

इस देशव्यापी अभियान की औपचारिक शुरुआत 7 मई को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे। मुख्य कार्यक्रम ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही देश के कई प्रमुख ESIC अस्पतालों में भी इस योजना को एक साथ लागू किया जाएगा।

किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?

नई व्यवस्था के तहत 40 वर्ष से अधिक उम्र के सभी पात्र कर्मचारियों का हर साल मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। यह सुविधा ESIC अस्पतालों और उनके नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध होगी। इसके अलावा, ऐसे कर्मचारी जो रसायनों, जहरीले पदार्थों या भारी मशीनों के बीच काम करते हैं, उनके लिए उम्र की कोई सीमा तय नहीं की गई है। इन कामगारों का नियमित हेल्थ चेकअप अनिवार्य किया गया है।

नए लेबर कोड से जुड़ी बड़ी पहल

यह योजना सरकार के नए श्रम सुधारों का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर चार नए लेबर कोड तैयार किए हैं। कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020 के तहत सामाजिक सुरक्षा के दायरे को पहले से अधिक व्यापक बनाया गया है। अब इस योजना का फायदा केवल संगठित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, डिलीवरी पार्टनर, ऐप आधारित कर्मचारी और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी इसके दायरे में शामिल होंगे।

स्वास्थ्य रिकॉर्ड भी होगा तैयार

सरकार सभी कर्मचारियों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है। इससे कर्मचारियों की लंबी अवधि तक स्वास्थ्य निगरानी संभव हो सकेगी और गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

जानकारों का मानना है कि बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों और कार्यस्थल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए यह कदम बेहद अहम है। नियमित जांच से समय रहते बीमारी की पहचान होगी और इलाज आसान हो सकेगा। इससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता और जीवन गुणवत्ता दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

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