सरकार और पीएफआरडीए का मानना है कि देश की बड़ी आबादी असंगठित क्षेत्र में काम करती है, लेकिन उनमें से अधिकांश लोगों के पास बुजुर्गावस्था के लिए सुरक्षित आर्थिक व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में यह नई योजना भविष्य की वित्तीय सुरक्षा देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
आसान निवेश पर रहेगा फोकस
एनपीएस संचय योजना को इस तरह तैयार किया गया है कि कम जानकारी रखने वाले लोग भी आसानी से इसमें निवेश कर सकें। कई बार लोगों को निवेश विकल्प और एसेट अलोकेशन समझने में परेशानी होती है, जिसके कारण वे पेंशन योजनाओं से दूर रहते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। यह योजना ऑल सिटीजन मॉडल और मल्टी स्कीम फ्रेमवर्क के तहत शुरू की गई है। इसका मकसद अंतिम स्तर तक ऐसे लोगों को जोड़ना है, जिन्हें वित्तीय सलाह आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती।
कौन उठा सकता है योजना का लाभ
इस योजना में 18 वर्ष से लेकर 85 वर्ष तक का कोई भी भारतीय नागरिक शामिल हो सकता है। यानी युवा वर्ग से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक इसमें पेंशन खाता खोल सकते हैं। इसके लिए निवेशकों को केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होगी और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। यह योजना खासतौर पर छोटे व्यापारियों, दिहाड़ी मजदूरों, घरेलू कामगारों, खेतिहर श्रमिकों और स्वरोजगार करने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
निवेश और निकासी के क्या है नियम?
एनपीएस संचय का निवेश पैटर्न अन्य सरकारी पेंशन योजनाओं की तरह रखा गया है। इसमें न्यूनतम योगदान और आगे निवेश करने के नियम सामान्य एनपीएस योजनाओं के समान होंगे। भविष्य में जरूरत के अनुसार पीएफआरडीए इन नियमों में बदलाव भी कर सकता है। निकासी और आंशिक निकासी के नियम भी मौजूदा एनपीएस व्यवस्था की तरह ही रहेंगे। इससे निवेशकों को पहले से लागू प्रणाली को समझने में आसानी होगी।
कम शुल्क में भी बेहतर मिलेगी सुविधा
इस योजना में लगने वाले शुल्क भी सीमित रखे गए हैं, ताकि कम आय वाले लोग बिना अतिरिक्त बोझ के इसमें निवेश कर सकें। बताया जा रहा है कि इसके चार्ज एनपीएस वात्सल्य और एनपीएस लाइट जैसी योजनाओं के अनुरूप होंगे। देश का असंगठित क्षेत्र करीब 90 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देता है। ऐसे में एनपीएस संचय योजना भविष्य में लाखों परिवारों को आर्थिक मजबूती देने का माध्यम बन सकती है।

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