चुनाव से पहले सड़क परियोजनाओं पर जोर
प्रदेश सरकार चाहती है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा सड़क, पुल और फ्लाईओवर परियोजनाओं को पूरा कर जनता को सौंप दिया जाए। इसी वजह से विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों को तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से गांव और शहरों के बीच संपर्क मजबूत होगा, व्यापार बढ़ेगा और लोगों की यात्रा आसान बनेगी।
लागत के हिसाब से तय हुई समयसीमा
पीडब्ल्यूडी ने परियोजनाओं को उनकी लागत के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है और हर श्रेणी के लिए निर्माण की समयसीमा तय की गई है।
20 करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं अब अधिकतम 9 महीने में पूरी करनी होंगी।
20 से 100 करोड़ रुपये तक की सड़क परियोजनाओं के लिए 15 महीने का समय तय किया गया है।
100 से 300 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजनाओं को 18 महीने में पूरा करना होगा।
300 करोड़ रुपये से अधिक की मेगा परियोजनाओं के लिए अधिकतम 30 महीने की अवधि निर्धारित की गई है।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य निर्माण कार्यों में देरी रोकना और जनता को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर तैयारी
सरकार ने संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 837 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में नई सड़कों के निर्माण के साथ-साथ पुराने पुलों की मरम्मत, रेलवे ओवर ब्रिज और प्रमुख चौराहों के चौड़ीकरण का काम भी शामिल है। शासन स्तर से इन परियोजनाओं के लिए बजट भी जारी कर दिया गया है ताकि फंड की कमी के कारण काम प्रभावित न हो।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
नई सड़क परियोजनाओं से गांवों को शहरों से जोड़ने में मदद मिलेगी। खराब और जर्जर सड़कों की समस्या कम होगी, जिससे लोगों का सफर आसान और सुरक्षित बनेगा। इसके अलावा व्यापार, परिवहन और उद्योगों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। किसानों को अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी, जबकि शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या कम करने के लिए फ्लाईओवर और चौड़ी सड़कें मददगार साबित होंगी।
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