हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं
नए लेबर कोड्स के तहत अब कर्मचारियों के काम के घंटे तय कर दिए गए हैं। किसी भी कर्मचारी से एक सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे तक ही काम लिया जा सकेगा। इसके साथ ही कंपनियों के लिए सप्ताह में कम से कम एक दिन की छुट्टी देना अनिवार्य कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे कर्मचारियों के कार्य और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
ओवरटाइम पर अतिरिक्त भुगतान
नई व्यवस्था में कर्मचारियों के अतिरिक्त काम को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। यदि कोई कर्मचारी तय समय से ज्यादा काम करता है, तो कंपनी को उसके बदले ओवरटाइम का भुगतान करना होगा। पहले कई जगहों पर कर्मचारियों से अतिरिक्त काम तो लिया जाता था, लेकिन उन्हें उसका अलग भुगतान नहीं मिलता था। अब नए नियम लागू होने के बाद कंपनियों को अतिरिक्त काम के बदले तय भुगतान करना अनिवार्य होगा।
नियुक्ति पत्र देना अब हुआ जरूरी
सरकार ने असंगठित क्षेत्रों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी राहत देने की कोशिश की है। अब हर कंपनी या नियोक्ता के लिए कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना जरूरी होगा। इससे कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा मिलेगी और बिना जानकारी या लिखित दस्तावेज के नौकरी से निकाले जाने जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।
कंपनियों को भी मिलेगी राहत
नए लेबर कोड्स सिर्फ कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि उद्योग जगत के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पहले कंपनियों को 29 अलग-अलग श्रम कानूनों के तहत कागजी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। अब सभी नियमों को चार प्रमुख कोड्स में समेट दिया गया है। इससे एचआर और कंप्लायंस से जुड़ी प्रक्रियाएं आसान होंगी और कानूनी जटिलताएं कम हो सकती हैं।
राज्यों की भूमिका भी अहम
हालांकि केंद्र सरकार ने नए नियमों को लागू करने की दिशा में अपनी प्रक्रिया पूरी कर दी है, लेकिन श्रम कानून समवर्ती सूची का विषय होने के कारण राज्य सरकारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। अब अलग-अलग राज्यों को भी अपने स्तर पर इन नियमों को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करनी होगी। कुछ राज्यों में यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकती है, जबकि कुछ जगहों पर इसमें समय लग सकता है।

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