रिपोर्ट के मुताबिक अब भारत इन समझौतों का पूरा फायदा उठाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में भारत के वस्तु और सेवा निर्यात को बढ़ाकर 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने एफटीए यूटिलाइजेशन प्लान पर काम तेज कर दिया है।
38 देशों के साथ मजबूत हुए व्यापारिक रिश्ते
भारत ने 2021 के बाद से कई बड़े देशों और आर्थिक समूहों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इनमें मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, न्यूजीलैंड, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे बड़े साझेदार शामिल हैं। इन समझौतों में कुल 38 देश शामिल हैं, जिनका वैश्विक आयात बाजार करीब 12 ट्रिलियन डॉलर का माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी बढ़त मिल सकती है।
इन सेक्टरों को मिलेगा बड़ा फायदा
एफटीए समझौतों का सबसे ज्यादा लाभ भारत के कई प्रमुख उद्योगों को मिलने की उम्मीद है। इनमें कृषि, कपड़ा और परिधान, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा उद्योग, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और दवा उद्योग प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों को कई देशों के बाजारों में कम शुल्क या शुल्क-मुक्त पहुंच मिल रही है, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
सरकार ने तेज की रणनीति
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल लगातार उद्योग संगठनों, निर्यात परिषदों और व्यापारिक संस्थाओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। सरकार चाहती है कि भारतीय कंपनियां इन व्यापार समझौतों का अधिकतम लाभ उठाएं और वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करें। हाल ही में कई उच्चस्तरीय बैठकों में निर्यात बढ़ाने, उत्पादन क्षमता मजबूत करने और वैश्विक मानकों के अनुसार कारोबार बढ़ाने पर चर्चा हुई।
भारतीय दूतावासों को भी मिली जिम्मेदारी
सरकार ने विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों को भी इस अभियान में शामिल किया है। दूतावासों की जिम्मेदारी होगी कि वे संबंधित देशों में भारतीय उत्पादों के लिए नए अवसर तलाशें, व्यापारिक जानकारी जुटाएं और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम कराने में मदद करें। इससे भारतीय निर्यातकों को विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान हो सकेगी।
भारत को मिल सकती है नई वैश्विक पहचान
जानकारों का मानना है कि भारत अब केवल सस्ते उत्पादों के निर्यात तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, ये एफटीए भारत को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकते हैं।

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