रजिस्ट्री से पहले करनी होगी ऑनलाइन प्रक्रिया
नई व्यवस्था के अनुसार जमीन खरीदने और बेचने वाले लोगों को सबसे पहले ई-निबंधन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी अपलोड करनी होगी। इसके बाद संबंधित अंचल कार्यालय दस्तावेजों और जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच करेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिस जमीन की रजिस्ट्री हो रही है, वह विवादित या सरकारी भूमि न हो।
आवेदन में देनी होगी पूरी जानकारी
ऑनलाइन आवेदन करते समय कई महत्वपूर्ण जानकारियां देना अनिवार्य किया गया है। इनमें खाता संख्या, खेसरा संख्या, जमाबंदी संख्या, रकबा, चौहद्दी और विक्रेता का नाम शामिल रहेगा। इन सभी विवरणों के आधार पर अंचलाधिकारी जमीन की स्थिति की जांच करेंगे। यदि दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तभी आगे की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
10 दिनों में देनी होगी जांच रिपोर्ट
सरकार ने अधिकारियों के लिए समय सीमा भी तय कर दी है। संबंधित सीओ को आवेदन मिलने के बाद 10 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट जारी करनी होगी। यदि तय समय के भीतर रिपोर्ट नहीं दी जाती है, तो पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। हालांकि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी, ताकि काम में लापरवाही न हो।
सरकारी या निजी जमीन की पहचान
नई व्यवस्था में सीओ को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित जमीन सरकारी है या निजी। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया जाएगा कि जमीन पर कोई विवाद तो नहीं है, दस्तावेज सही हैं या नहीं और विक्रेता का दावा वैध है या नहीं। इससे खरीदार को पहले ही जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल जाएगी और बाद में विवाद की संभावना कम होगी।
धोखाधड़ी और फर्जी रजिस्ट्री पर रोक
राज्य सरकार का कहना है कि इस नई प्रणाली से जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामलों में बड़ी कमी आएगी। कई बार लोग गलत दस्तावेज दिखाकर जमीन बेच देते हैं, जिससे खरीदार को बाद में कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब जांच प्रक्रिया अनिवार्य होने से ऐसे मामलों पर काफी हद तक रोक लग सकेगी। साथ ही जमीन खरीदने वाले लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।
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