10 लाख से ज्यादा आय वालों पर कार्रवाई
सरकार के नियमों के अनुसार जिन लोगों या उनके परिवार की सालाना आय 10 लाख रुपये या उससे अधिक है, वे एलपीजी सब्सिडी के पात्र नहीं माने जाएंगे। यह नियम पहले भी लागू था, लेकिन अब इसे पूरी तरह ऑटोमेटिक सिस्टम के जरिए लागू किया जा रहा है। पहले सरकार गिव इट अप अभियान के जरिए लोगों से स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने की अपील करती थी, लेकिन अब डेटा के आधार पर सीधे कार्रवाई की जाएगी।
आयकर विभाग के रिकॉर्ड से हो रही जांच
पेट्रोलियम मंत्रालय ने आयकर विभाग के डेटाबेस को एलपीजी उपभोक्ताओं के रिकॉर्ड से जोड़ दिया है। इसके जरिए ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान की जा रही है जिनकी आय तय सीमा से अधिक है। यदि किसी ग्राहक या उसके परिवार के सदस्य की आय निर्धारित सीमा से ऊपर पाई जाती है, तो संबंधित तेल कंपनी की ओर से आधिकारिक एसएमएस भेजा जा रहा है।
जवाब नहीं दिया तो बंद होगी सब्सिडी
सरकार की ओर से भेजे गए संदेश में साफ कहा गया है कि यदि ग्राहक तय समय के भीतर जवाब नहीं देते हैं, तो उनकी गैस सब्सिडी बंद कर दी जाएगी। सब्सिडी बंद होने के बाद सिलेंडर की पूरी कीमत उपभोक्ता को खुद चुकानी होगी, जिससे घरेलू बजट पर असर पड़ सकता है।
सब्सिडी बचाने के लिए क्या करें?
यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उसके खिलाफ गलत डेटा का इस्तेमाल हुआ है, तो वह शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए सरकार ने सात दिन का समय दिया है। ग्राहक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकते हैं या संबंधित तेल कंपनी के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी अपडेट कर सकते हैं।
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