आपको बता दें की यातायात विभाग ने शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ 'ऑपरेशन मीट एंड ग्रीट' अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत टोल प्लाजा और प्रमुख मार्गों पर विशेष जांच अभियान चलाकर वाहन चालकों की जांच की जा रही है।
हजारों वाहनों की हुई जांच
यातायात विभाग के अनुसार 9 और 10 मई को प्रदेश के 135 टोल प्लाजा पर विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान करीब 69 हजार से ज्यादा वाहनों की जांच की गई। जांच के दौरान शराब पीकर वाहन चलाने वाले 2,654 चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इन पर कुल 2.65 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया और चालान काटे गए।
पुलिस और होमगार्ड की बड़ी तैनाती
अभियान को सफल बनाने के लिए यातायात पुलिस, नागरिक पुलिस और होमगार्ड के हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया। जांच टीमों को ब्रेथ एनालाइजर, बॉडी वार्न कैमरा, रिफ्लेक्टिव जैकेट और अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए ताकि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित रहे।
प्रदेश में डंपर और ट्रकों की भी जांच
अभियान के दौरान निर्माण सामग्री ढोने वाले डंपर और ट्रकों की हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की भी जांच की गई। अधिकारियों ने मौके पर ही दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन की पुष्टि की। यातायात विभाग का कहना है कि सड़क सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या है मोटर वाहन अधिनियम का कानून?
मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के अनुसार यदि किसी चालक के रक्त में अल्कोहल की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई जाती है, तो यह दंडनीय अपराध माना जाता है। पहली बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या छह महीने तक की जेल हो सकती है। वहीं दोबारा गलती करने पर 15 हजार रुपये तक का जुर्माना और दो साल तक की सजा का प्रावधान है।
यातायात पुलिस के द्वारा लोगों से की गई अपील
यातायात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि शराब पीकर वाहन न चलाएं और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही न केवल चालक बल्कि दूसरे लोगों की जान के लिए भी खतरा बन सकती है। प्रदेश में सड़क हादसों को कम करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे भी इस तरह के अभियान जारी रहेंगे।
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