यूपी में इन शिक्षकों पर होगी FIR, आदेश से मचा हड़कंप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। बेसिक शिक्षा विभाग की जांच में ऐसे कई मामले पकड़े गए हैं, जहां फर्जी शैक्षणिक अभिलेखों के आधार पर शिक्षक की नौकरी हासिल की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब विभाग ने संबंधित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान अधिकारियों को कई संदिग्ध मामले मिले, जिनमें एक ही शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अंकपत्र का उपयोग कर अलग-अलग लोगों द्वारा नौकरी पाने की बात सामने आई। जांच में ऐसे 11 शिक्षकों की पहचान की गई है, जिन पर जल्द कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा

विभागीय जांच के दौरान यह भी पता चला कि कुछ शिक्षकों के नाम, पिता का नाम और जन्मतिथि तक समान हैं, लेकिन मानव संपदा पोर्टल पर उनकी अलग-अलग आईडी सक्रिय हैं। इससे अधिकारियों को गड़बड़ी का संदेह हुआ। जब रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो कई मामलों में एक ही दस्तावेज का इस्तेमाल दो अलग व्यक्तियों द्वारा किया जाना पाया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल दस्तावेजी गलती नहीं बल्कि सुनियोजित फर्जीवाड़ा प्रतीत होता है। इसी कारण अब संबंधित जिलों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

इन जिलों में मिले संदिग्ध मामले

प्राथमिक जांच में गाजीपुर, सुलतानपुर, आजमगढ़, बलरामपुर, आगरा, वाराणसी और चंदौली समेत कई जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं। विभाग ने इन जिलों के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और दोषियों की पहचान कर एफआईआर दर्ज कराने को कहा है।

मानव संपदा पोर्टल से खुला मामला

मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों के शैक्षणिक और सेवा रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से अपडेट किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के दौरान डबल आईडी और समान अभिलेखों का पता चला। विभाग अब सभी रिकॉर्ड की दोबारा जांच कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।

दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ न केवल एफआईआर दर्ज होगी, बल्कि उनकी नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।

सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फर्जी नियुक्तियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। ऐसे मामलों के सामने आने के बाद विभाग अब अन्य जिलों के रिकॉर्ड की भी गहन जांच कराने की तैयारी कर रहा है।

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