भारत ने अब दिखाई हाइपरसोनिक ताकत, दुनिया हैरान

नई दिल्ली। भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया को अपनी बढ़ती सैन्य ताकत का संकेत दे दिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम के तहत 'स्क्रैमजेट कांबस्टर' का सफल लंबी अवधि परीक्षण किया है। इस सफलता को भारत की भविष्य की रक्षा रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर सकती है, जिनके पास हाइपरसोनिक तकनीक विकसित करने की क्षमता है। इस सफलता के बाद चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

20 मिनट तक चला स्क्रैमजेट इंजन

हैदराबाद स्थित डीआरडीएल में हुए परीक्षण के दौरान स्क्रैमजेट इंजन करीब 1,200 सेकेंड यानी लगभग 20 मिनट तक लगातार सफलतापूर्वक संचालित हुआ। इससे पहले जनवरी में 700 सेकेंड तक परीक्षण किया गया था, लेकिन इस बार की सफलता को कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह परीक्षण इसलिए खास है क्योंकि हाइपरसोनिक तकनीक में लंबे समय तक स्थिर और नियंत्रित इंजन संचालन सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है।

क्या होती है हाइपरसोनिक मिसाइल

हाइपरसोनिक मिसाइलें आवाज की गति से पांच गुना या उससे अधिक रफ्तार से उड़ान भर सकती हैं। इतनी तेज गति के कारण इन्हें ट्रैक करना और रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। इन मिसाइलों की एक और बड़ी खासियत यह है कि उड़ान के दौरान ये दिशा बदल सकती हैं। यही कारण है कि आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी इन्हें रोकने में कठिनाई महसूस करते हैं। भविष्य के युद्धों में इस तकनीक को गेम चेंजर माना जा रहा है।

अमेरिका, रूस और चीन की कतार में भारत

अब तक अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश ही हाइपरसोनिक तकनीक में आगे माने जाते रहे हैं। लेकिन डीआरडीओ की इस सफलता ने संकेत दिया है कि भारत भी तेजी से इस विशेष रक्षा क्लब की ओर बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत स्वदेशी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने में सफल हो जाता है, तो इससे देश की सामरिक शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी। यह तकनीक न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत बनाएगी।

स्क्रैमजेट तकनीक क्यों है खास, भारत को जरूरत

हाइपरसोनिक मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाला स्क्रैमजेट इंजन सामान्य इंजन से काफी अलग होता है। यह हवा से सीधे ऑक्सीजन लेकर काम करता है, जिससे मिसाइल को अलग से ऑक्सीजन ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मिसाइल हल्की बनती है और उसकी गति व मारक क्षमता बढ़ जाती है। साथ ही यह लंबी दूरी तक बेहद तेज रफ्तार से हमला करने में सक्षम होती है।

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