क्या है DAC सिस्टम?
DAC सिस्टम के तहत जब कोई ग्राहक गैस सिलेंडर बुक करता है, तो उसके मोबाइल नंबर पर एक खास कोड भेजा जाता है। सिलेंडर की डिलीवरी के समय ग्राहक को यही कोड डिलीवरी बॉय को बताना होता है। कोड मिलान होने के बाद ही सिलेंडर की डिलीवरी पूरी मानी जाती है। इससे गलत व्यक्ति को सिलेंडर पहुंचने की संभावना काफी कम हो गई है।
कंपनियों ने जारी की चेतावनी
गैस कंपनियों ने ग्राहकों को साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। कंपनियों का कहना है कि असली मैसेज केवल आधिकारिक सेंडर ID से ही भेजे जाते हैं। इनमें मिलने वाला OTP या DAC कोड केवल डिलीवरी के समय ही साझा करना चाहिए। कंपनियों ने साफ किया है कि कोई भी कर्मचारी फोन कॉल, WhatsApp मैसेज या किसी लिंक के जरिए OTP नहीं मांगता। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की जानकारी मांगता है, तो उसे तुरंत नजरअंदाज करना चाहिए।
इंडेन ग्राहकों के लिए खास सलाह
इंडेन गैस उपभोक्ताओं को भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। यदि आपने सिलेंडर बुक नहीं किया और फिर भी कोई मैसेज आता है, तो उस पर भरोसा न करें। असली मैसेज में बुकिंग नंबर और DAC कोड स्पष्ट रूप से लिखा होता है। यह कोड तभी साझा करें जब डिलीवरी बॉय आपके घर पर सिलेंडर लेकर पहुंच जाए।
कैसे रहें सुरक्षित?
केवल आधिकारिक मैसेज पर ही भरोसा करें
किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
OTP या DAC कोड किसी के साथ फोन पर साझा न करें
डिलीवरी के समय ही कोड बताएं
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत तुरंत गैस एजेंसी या कंपनी हेल्पलाइन पर करें
नई व्यवस्था से गैस डिलीवरी प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित हुई है, लेकिन ग्राहकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी आपको साइबर ठगी से बचा सकती है।

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