शुभेंदु सरकार का एक्शन, बंगाल में इन कर्मचारियों पर गिरी गाज

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए गैर-वैधानिक निकायों, बोर्डों और सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत सभी नामित सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया है।

राज्य सरकार के गृह एवं पर्वतीय मामलों विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह फैसला सरकार के बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन अभियान का हिस्सा है।

नामित पदाधिकारियों की सेवाएं समाप्त

सरकार की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि नामित आधार पर कार्यरत सभी पदाधिकारियों की सेवाएं तत्काल समाप्त की जाती हैं। यह आदेश राज्य के विभिन्न बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों में लागू होगा। रिपोर्ट के अनुसार सरकार प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और नई कार्यशैली लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

60 वर्ष से अधिक आयु वाले पर भी कार्रवाई

सरकार ने उन अधिकारियों को भी हटाने का निर्णय लिया है जो सेवानिवृत्ति की आयु पूरी करने के बाद सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति पर काम कर रहे थे। आदेश के मुताबिक अब ऐसे सभी एक्सटेंशन और पुनर्नियोजन तत्काल प्रभाव से समाप्त माने जाएंगे। इस फैसले को राज्य प्रशासन में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

पहली कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले

नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में भी कई अहम फैसले लिए गए। सीमाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बीएसएफ को आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने भूमि एवं राजस्व विभाग को 45 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।

केंद्र की योजनाओं को तेजी से लागू करने की तैयारी

सरकार ने आयुष्मान भारत योजना को राज्य में लागू करने का भी फैसला लिया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, पीएम श्री योजना, विश्वकर्मा योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला योजना जैसी कई केंद्रीय योजनाओं को तेजी से लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला अधिकारियों को लंबित आवेदनों को जल्द केंद्र सरकार तक भेजने को कहा गया है।

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