जिला स्तर पर ही होगा आयुष्मान कार्ड से जुड़ा समाधान
नई व्यवस्था के तहत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), जिला आयुष्मान अधिकारी और जिला कार्यान्वयन इकाई की टीमों को विशेष तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अब जिले के अधिकारी आयुष्मान कार्ड से जुड़ी कई तकनीकी समस्याओं को स्थानीय स्तर पर ही हल कर सकेंगे। इसमें कार्ड अप्रूवल, रिजेक्ट होने या कार्ड को निष्क्रिय करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
लखनऊ आने की जरूरत होगी कम
पहले आयुष्मान कार्ड से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए लाभार्थियों को साचीज कार्यालय से संपर्क करना पड़ता था। इससे दूर-दराज के लोगों को परेशानी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को अपने जिले में ही समाधान मिलने की उम्मीद है। इससे योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया और आसान हो जाएगी।
क्लेम और भुगतान व्यवस्था में भी सुधार
सरकार ने आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों के क्लेम और भुगतान प्रक्रिया को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया है। उत्तर प्रदेश में दावों के निस्तारण का औसत समय करीब 57 दिन बताया गया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत करीब 73 दिन है। सरकार का लक्ष्य है कि इलाज से जुड़े भुगतान और दावों का निपटारा ज्यादा तेज और पारदर्शी तरीके से हो।
अनियमित अस्पतालों पर कार्रवाई
आयुष्मान योजना में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सरकार ने सख्ती भी बढ़ाई है। जानकारी के अनुसार, नियमों का पालन नहीं करने वाले करीब 200 अस्पतालों को योजना से बाहर किया गया है, जबकि लगभग 300 अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि सिर्फ उन्हीं अस्पतालों को योजना से जोड़ा जाएगा जो तय मानकों के अनुसार मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध करा रहे हैं।
लाभार्थियों को मिलेगा सीधा फायदा
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आयुष्मान कार्ड धारकों को मिलेगा। कार्ड से जुड़ी छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए अब लंबी प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ेगा। डिजिटल व्यवस्था और जिला स्तर पर समाधान मिलने से स्वास्थ्य योजना का लाभ जरूरतमंद लोगों तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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