किसानों को मिलेंगे गोवंशी और आर्थिक सहायता
प्रस्तावित मॉडल के तहत पात्र किसानों को सरकारी योजना के माध्यम से गोवंशी उपलब्ध कराए जाएंगे। उनके पालन-पोषण के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। योजना के अनुसार किसानों को अधिकतम 4 गाय और 6 बैल या नंदी गोवंशी उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था की जा सकती है। गोवंशी के रखरखाव के लिए किसानों को प्रति पशु 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में भेजी जाएगी।
पशु शेड और बायोगैस संयंत्र पर अनुदान
किसानों को सुविधा देने के लिए पशु शेड निर्माण और बायोगैस संयंत्र लगाने को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला किसानों को बायोगैस संयंत्र की लागत पर 90 प्रतिशत तक अनुदान देने की योजना है। वहीं सामान्य वर्ग के किसानों को करीब 50 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है।
स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद को बढ़ावा
सरकार का लक्ष्य सिर्फ प्राकृतिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में स्वच्छ ऊर्जा के स्रोत बढ़ाना भी है। गोबर गैस और बायोगैस संयंत्रों से जहां ईंधन मिलेगा, वहीं जैविक खाद भी तैयार होगी। इस योजना से खेती, पशुपालन और ऊर्जा उत्पादन को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
प्राकृतिक खेती से कम होगी लागत
गोवंश आधारित खेती में गोबर खाद, जीवामृत, घनजीवामृत और वर्मी कंपोस्ट जैसे प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग बढ़ेगा। इससे जमीन की उर्वरता बेहतर होगी और किसानों को महंगी रासायनिक खादों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इससे खेती की लागत घटेगी और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
लाखों किसान पहले से जुड़े
प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अब तक 1886 किसान समूह बनाए जा चुके हैं, जिनसे करीब 2.35 लाख किसान जुड़े हैं। राज्य में हर साल बड़ी मात्रा में गोबर खाद की जरूरत होती है। गो-आधारित खेती से इस मांग को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
0 comments:
Post a Comment