गांव-गांव लगेंगे विशेष कैंप
विभाग की ओर से श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन बढ़ाने के लिए पंचायत और गांव स्तर पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि कई मजदूर जानकारी के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं, इसलिए अब सीधे उनके बीच पहुंचकर उन्हें जोड़ा जाएगा।
प्रवासी मजदूरों के लिए शुरू हुआ खास ऐप
बिहार से बाहर काम करने वाले मजदूरों का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए “बिहार प्रवासी कामगार ऐप” की शुरुआत की गई है। इस ऐप के जरिए अब तक लाखों प्रवासी श्रमिकों का निबंधन किया जा चुका है। इससे सरकार को प्रवासी मजदूरों तक सहायता और योजनाओं का लाभ पहुंचाने में आसानी होगी।
प्रवासी मजदूरों के परिवार को बढ़ी सहायता राशि
सरकार ने प्रवासी मजदूरों के हित में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी प्रवासी श्रमिक की मृत्यु होने पर उसके परिवार को मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा अगर राज्य से बाहर या विदेश में काम करने वाले मजदूर की दुर्घटना में मौत होती है, तो उसके शव को घर तक पहुंचाने का खर्च भी सरकार उठाएगी।
मजदूरों को दुर्घटना योजना से मिल रही आर्थिक मदद
प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को सहायता दी जा रही है। वर्ष 2025-26 में सैकड़ों लाभुकों को करोड़ों रुपये की सहायता राशि दी गई है। इससे दुर्घटना प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहारा मिल रहा है।
बिहार में सभी श्रमिकों को एक जगह मिलेगी सभी सुविधा
राज्य के नौ प्रमंडलों में श्रम सेवा सुविधा केंद्र तैयार किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर श्रमिकों को एक ही स्थान पर कई सुविधाएं मिलेंगी। यहां मजदूरों का निबंधन, नवीकरण और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

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