सरकार ने सभी जिलों में भूमि वर्गीकरण पंजी तैयार करने का निर्णय लिया है। इसके लिए अंचल स्तर पर सर्वे कराया जाएगा, जिसमें जमीन की वास्तविक श्रेणी का निर्धारण किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी जिला पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को सौंपी गई है।
पूरे बिहार में जमीन चार क्षेत्रों में बांटी गई
नए नियमों के तहत राज्य की सभी जमीनों को चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: शहरी क्षेत्र, ग्रामीण क्षेत्र, मेट्रोपोलिटन क्षेत्र, पेरिफेरल (शहर से सटे) क्षेत्र। इन क्षेत्रों के आधार पर ही आगे जमीन की श्रेणियां और सर्किल रेट तय किए जाएंगे।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग श्रेणियां तय
सरकार ने जमीन की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में 7 श्रेणियां तय: ग्रामीण इलाकों में जमीन को सात श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें शामिल हैं: व्यावसायिक भूमि, औद्योगिक भूमि, आवासीय भूमि, मुख्य सड़क या हाईवे के किनारे की भूमि, सिंचित भूमि, असिंचित भूमि, बलुआही, पथरीली, दियारा एवं चंवर भूमि।
शहरी क्षेत्रों में 6 श्रेणियां तय: शहरी और पटना मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में जमीन को छह श्रेणियों में बांटा गया है: प्रधान सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि, मुख्य सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि, औद्योगिक भूमि, शाखा सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि, अन्य सड़क या गली की आवासीय भूमि, कृषि एवं गैर-आवासीय भूमि।
पेरिफेरल क्षेत्रों में अलग सर्किल रेट व्यवस्था
शहर से सटे पेरिफेरल क्षेत्रों की जमीन का वर्गीकरण ग्रामीण क्षेत्रों की तरह ही सात श्रेणियों में किया जाएगा, लेकिन यहां सर्किल रेट अलग होगा। इन क्षेत्रों की जमीन की कीमत गांवों से अधिक और शहरों से कम तय की जाएगी। इसका निर्धारण जिला मूल्यांकन समिति द्वारा किया जाएगा, ताकि बाजार के अनुसार संतुलित दर तय हो सके।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जमीन के मूल्यांकन में पारदर्शिता आएगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सरल होगी। इससे जमीन विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा विभागीय योजना के अनुसार अगला व्यापक सर्वे वर्ष 2029 में किया जाएगा, जिससे भूमि रिकॉर्ड को समय-समय पर अपडेट रखा जा सके।
रैयतों के लिए क्या होगा फायदा?
इस नई व्यवस्था से रैयतों को जमीन की सही कीमत और स्पष्ट वर्गीकरण की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत मूल्यांकन की संभावना कम होगी। यह कदम बिहार की भूमि व्यवस्था को आधुनिक और अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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