30 साल पुराने दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध
फिलहाल बिहार में साल 1996 से 2026 तक के जमीन रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए गए हैं। इन रिकॉर्ड्स की प्रमाणित कॉपी लोग निबंधन विभाग के ई-निबंधन पोर्टल के माध्यम से देख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर डाउनलोड भी कर सकते हैं। इस सुविधा से जमीन मालिकों को पुराने कागजात निकालने के लिए कार्यालयों में जाने की परेशानी से राहत मिलेगी।
लाखों दस्तावेजों का हो चुका है डिजिटलीकरण
विभाग के अनुसार, वर्ष 2006 के बाद के करीब 47 लाख 55 हजार दस्तावेजों की पीडीएफ फाइल तैयार कर पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड आसानी से मिल रहे हैं। अब विभाग इससे भी पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने की प्रक्रिया में जुटा है।
1908 से 1995 तक के रिकॉर्ड पर काम जारी
सरकार की योजना है कि पुराने से पुराने जमीन दस्तावेजों को भी ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाए। इसके तहत 1908 से 1995 के बीच के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इस अवधि के करोड़ों दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल रूप दिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, कई लाख दस्तावेजों का काम पूरा हो चुका है और बाकी रिकॉर्ड को भी जल्द ऑनलाइन लाने की प्रक्रिया चल रही है।
10 एजेंसियां कर रही डिजिटलीकरण का काम
पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने के लिए कई एजेंसियों को लगाया गया है। वर्तमान में करीब 10 एजेंसियां इस काम में लगी हुई हैं। दस्तावेजों की स्कैनिंग, पीडीएफ तैयार करने और उन्हें पोर्टल पर अपलोड करने का काम तेजी से किया जा रहा है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आम लोग पुराने जमीन रिकॉर्ड को भी ऑनलाइन एक्सेस कर पाएंगे।
फर्जीवाड़े और जमीन विवाद पर लगेगी रोक
जमीन के दस्तावेज ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। लोग किसी भी प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच आसानी से कर सकेंगे। इससे फर्जी कागजात बनाकर जमीन कब्जाने या धोखाधड़ी करने जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा जमीन खरीदने से पहले दस्तावेजों की जांच करना भी आसान हो जाएगा।
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