क्या है RELOS समझौता?
RELOS यानी Reciprocal Exchange of Logistics Agreement एक ऐसा समझौता है जिसके तहत दो देश सैन्य लॉजिस्टिक सहयोग करते हैं। इसके अंतर्गत सेना को जरूरी सुविधाएं जैसे: ईंधन की व्यवस्था, भोजन और पानी, मरम्मत और रखरखाव, मेडिकल सहायता, परिवहन सुविधा, संचार और भंडारण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। इसके अलावा सैन्य अभ्यास, संयुक्त प्रशिक्षण और आपदा राहत जैसे अभियानों में भी दोनों देशों के बीच तालमेल आसान हो जाता है।
भारत पहले भी कर चुका है ऐसे समझौते
भारत ने इससे पहले भी कई देशों के साथ ऐसे लॉजिस्टिक समझौते किए हैं। इनमें अमेरिका, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और अन्य देशों के साथ हुए समझौते शामिल हैं। भारत और अमेरिका के बीच हुए LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) के तहत भी इसी तरह की सैन्य सुविधाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था है। इन समझौतों का मकसद सैन्य संचालन को आसान बनाना होता है, न कि दूसरे देश को सैन्य अड्डा उपलब्ध कराना।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह डील?
भारत और रूस लंबे समय से रक्षा साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच हथियारों, तकनीक और सैन्य सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। RELOS समझौते से दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ सकता है। खासकर समुद्री क्षेत्र, सैन्य अभ्यास और दूरदराज इलाकों में ऑपरेशन के दौरान यह सहयोग उपयोगी साबित हो सकता है। इस समझौते में एक खास पहलू यह भी बताया जा रहा है कि भारतीय सैन्य कर्मियों के लिए रूस के आर्कटिक क्षेत्र की सैन्य सुविधाओं तक पहुंच के अवसर बढ़ सकते हैं।

0 comments:
Post a Comment