8वें वेतन आयोग में बड़ा बदलाव? कर्मचारियों ने की बड़ी मांग

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। वेतन आयोग के सामने सुझाव और मांगें भेजने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी गई मांगों पर चर्चा हो रही है। 

इसी बीच रेलवे के प्रमुख कर्मचारी संगठन IRTSA ने वेतन बढ़ोतरी को लेकर एक अहम प्रस्ताव रखा है, जिसमें सभी कर्मचारियों के लिए एक जैसा फिटमेंट फैक्टर रखने के बजाय पे-लेवल के हिसाब से अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की गई है।

न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग

IRTSA ने अपने प्रस्ताव में केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 52,600 रुपये करने की मांग रखी है। संगठन का कहना है कि बढ़ती महंगाई और मौजूदा खर्चों को देखते हुए नए वेतन ढांचे में कर्मचारियों को बेहतर राहत मिलनी चाहिए। इसके अलावा संगठन ने पद, जिम्मेदारी और काम की प्रकृति के आधार पर वेतन निर्धारण करने की मांग भी रखी है।

फिटमेंट फैक्टर का सुझाव

कर्मचारी संगठन की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। अभी तक वेतन आयोगों में एक समान फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन इस बार कर्मचारियों ने इसमें बदलाव का सुझाव दिया है।

प्रस्ताव के अनुसार:

लेवल 1 से 5 तक के कर्मचारियों के लिए 2.92 फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है।

लेवल 6, 7 और 8 जैसे सुरक्षा और सुपरवाइजरी पदों के लिए करीब 3.50 फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया गया है।

लेवल 9 से 12 तक के पदों के लिए 3.80 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग रखी गई है।

संगठन का तर्क है कि अधिक जिम्मेदारी वाले पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन में ज्यादा लाभ मिलना चाहिए।

DA बढ़ोतरी के बाद बढ़ी उम्मीदें

केंद्रीय कर्मचारियों को पहले ही महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का लाभ मिला है। DA बढ़ने के बाद कर्मचारियों की उम्मीदें 8वें वेतन आयोग से और बढ़ गई हैं। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि नए वेतन आयोग में सिर्फ वेतन ही नहीं बल्कि भत्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं में भी सुधार किया जाना चाहिए।

कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?

8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने और सरकार को सौंपने के लिए तय समय दिया गया है। माना जा रहा है कि आयोग अपनी रिपोर्ट 2027 के आसपास सरकार को सौंप सकता है। इसके बाद सरकार की मंजूरी, नियमों की प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था तैयार होने में समय लग सकता है।

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