भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, 12 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9.985 अरब डॉलर घटकर 671.625 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले भी एक सप्ताह में करीब 711 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी।
रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आया भंडार
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी 2026 में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा था। 27 फरवरी 2026 को देश का फॉरेक्स रिजर्व 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था। इसके बाद इसमें लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का अहम संकेत माना जाता है। इसमें विदेशी मुद्रा संपत्ति, सोना, एसडीआर और आईएमएफ रिजर्व जैसी चीजें शामिल होती हैं।
सोने के भंडार में सबसे ज्यादा गिरावट
इस बार विदेशी मुद्रा भंडार में कमी का मुख्य कारण सोने के मूल्य में गिरावट रही। आरबीआई के सोने के भंडार की कीमत में एक सप्ताह के दौरान 10.754 अरब डॉलर की बड़ी कमी आई है। अब भारत के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू घटकर करीब 100.112 अरब डॉलर रह गई है। मार्च 2026 के अंत तक आरबीआई के पास लगभग 880.52 टन सोना मौजूद था, जो देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7 प्रतिशत हिस्सा है। सोने की कीमतों में बदलाव का सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार की कुल वैल्यू पर पड़ता है।
विदेशी मुद्रा संपत्ति में हुई बढ़ोतरी
जहां एक तरफ कुल विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई है, वहीं विदेशी मुद्रा आस्तियों (Foreign Currency Assets) में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 12 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में FCA में 846 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है। इसके बाद भारत की विदेशी मुद्रा आस्तियां बढ़कर 544.290 अरब डॉलर हो गई हैं। एफसीए में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी विदेशी मुद्राओं के मूल्य में बदलाव का असर भी शामिल होता है।
SDR और IMF रिजर्व में भी कमी
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारत के विशेष आहरण अधिकार (SDR) में भी हल्की गिरावट आई है। SDR में करीब 66 मिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में भी 11 मिलियन डॉलर की कमी आई है। अब IMF रिजर्व घटकर 4.815 अरब डॉलर रह गया है।

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