यूपी में नौकरी के साथ D.El.Ed-BTC करने वालों पर बड़ी कार्रवाई, प्रमाणपत्र रद्द

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में डीएलएड (D.El.Ed) और बीटीसी प्रशिक्षण को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए जरूरी इस प्रशिक्षण को नौकरी या किसी अन्य नियमित पढ़ाई के साथ करना नियमों के खिलाफ माना गया है। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (PNP) ने जांच के बाद कई अभ्यर्थियों के डीएलएड/बीटीसी प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं।

रेगुलर प्रशिक्षण के दौरान नौकरी करना पड़ा भारी

डीएलएड एक दो वर्षीय नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें अभ्यर्थियों की प्रशिक्षण संस्थान में लगातार उपस्थिति जरूरी होती है। नियमों के अनुसार प्रशिक्षण के समय अभ्यर्थी किसी अन्य नौकरी या रेगुलर कोर्स में शामिल नहीं हो सकता। लेकिन जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने सरकारी विभागों में नौकरी करते हुए डीएलएड/बीटीसी प्रशिक्षण पूरा कर लिया। शिकायत मिलने के बाद पीएनपी ने इन मामलों की जांच कराई, जिसमें कई जगह नियमों का उल्लंघन पाया गया।

छह जिलों के मामलों में हुई कार्रवाई

एटा जिले के एक अभ्यर्थी ने लेखपाल पद पर नौकरी करते हुए वर्ष 2014 बैच का बीटीसी प्रशिक्षण लिया। 

गाजीपुर में एक अभ्यर्थी बीटीसी प्रशिक्षण के दौरान अनुदेशक पद पर कार्यरत था।

कासगंज के एक अभ्यर्थी ने बीटीसी प्रशिक्षण के दौरान एलएलबी की नियमित पढ़ाई भी जारी रखी।

कौशांबी में एक अभ्यर्थी पंचायत सहायक पद पर रहते हुए डीएलएड प्रशिक्षण पूरा कर चुका था। 

चंदौली के मामले में अभ्यर्थी चिकित्सा विभाग में डाटा ऑपरेटर की नौकरी करते हुए बीटीसी कर रहा था। 

मेरठ के एक अभ्यर्थी ने डीएलएड प्रशिक्षण के साथ बीएसए कार्यालय में जिला समन्वयक के पद पर काम किया। 

शिक्षक भर्ती में अब नहीं मिलेगा लाभ

डीएलएड और बीटीसी प्रमाणपत्र प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए महत्वपूर्ण योग्यता मानी जाती है। ऐसे में प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद संबंधित अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। विभाग का कहना है कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई की गई है। आने वाले समय में भी यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो जांच के बाद कार्रवाई की जा सकती है।

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