जिरकोनियम एक विशेष प्रकार की धातु है, जो अपनी मजबूती और अधिक तापमान सहने की क्षमता के लिए जानी जाती है। इसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, रासायनिक उद्योगों, आभूषण निर्माण और दंत चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।
महोबा में मिला उच्च गुणवत्ता वाला भंडार
बुंदेलखंड के हरपालपुर-महोबकान्त इलाके में जिरकोनियम की मौजूदगी सामने आई है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और केंद्र सरकार के खान मंत्रालय की जांच के बाद इसकी गुणवत्ता की पुष्टि की गई है। जांच में पाया गया कि यहां मौजूद जिरकोनियम उच्च गुणवत्ता का है। इसकी खासियत यह है कि यह बहुत अधिक तापमान को भी सहन कर सकता है और लगभग 1855 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर पिघलता है।
यूपी में पहली बार जिरकोनियम खनन की तैयारी
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पहली बार जिरकोनियम का भंडार मिला है। इसके खनन से प्रदेश सरकार को राजस्व मिलने के साथ-साथ बुंदेलखंड क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। खनन गतिविधियां शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर काम के अवसर बढ़ने और क्षेत्र में निवेश आने की संभावना जताई जा रही है।
बंगाल की कंपनी को मिला खनन का अधिकार
केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों से जुड़ी नीलामी प्रक्रिया में बंगाल की माहेश्वरी माइनिंग कंपनी को जिरकोनियम खनन के लिए लाइसेंस मिला है। अब कंपनी निर्धारित नियमों के अनुसार इस क्षेत्र में खनन का काम शुरू करेगी। इससे बुंदेलखंड की पहचान खनिज उत्पादन के एक नए केंद्र के रूप में बन सकती है।
देश में यूपी बना जिरकोनियम वाला चौथा राज्य
अभी तक भारत में ओडिशा, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में जिरकोनियम पाया जाता था। महोबा में भंडार मिलने के बाद उत्तर प्रदेश भी इस सूची में शामिल हो गया है। यह खोज प्रदेश के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जिरकोनियम को रणनीतिक खनिजों की श्रेणी में रखा जाता है।
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