नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण इलाकों में जमीन का न्यूनतम मूल्य करीब 1.6 गुना तक बढ़ाया गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में सर्किल रेट में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी की गई है। इसका मतलब है कि अब जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए खरीदारों को पहले से ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ेगी।
राजधानी के प्रमुख इलाकों में जमीन के दाम बढ़े
पटना के पॉश और व्यावसायिक क्षेत्रों में जमीन की सरकारी कीमतों में सबसे ज्यादा बदलाव हुआ है। फ्रेजर रोड जैसे प्रमुख इलाके में जमीन का सर्किल रेट काफी बढ़ गया है। यहां पहले जमीन की कीमत लगभग 21 लाख से 40 लाख रुपये प्रति डिसमिल के बीच थी, जो अब बढ़कर 42 लाख से 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक पहुंच गई है।
बोरिंग रोड और बेली रोड में भी बढ़े रेट
पटना के दूसरे बड़े इलाकों में भी जमीन के नए सरकारी मूल्य बढ़ा दिए गए हैं। बोरिंग रोड में जमीन की कीमत अब लगभग 41 लाख से 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक पहुंच गई है। वहीं नेहरू पथ यानी बेली रोड इलाके में नया सर्किल रेट करीब 38 लाख से 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल तय किया गया है। इसके अलावा आशियाना रोड में जमीन का मूल्य बढ़कर 35.50 लाख से 60 लाख रुपये प्रति डिसमिल और अशोक राजपथ इलाके में 40 लाख से 80 लाख रुपये प्रति डिसमिल तक पहुंच गया है।
खरीदारों की जेब पर पड़ेगा असर
सर्किल रेट बढ़ने का असर सिर्फ जमीन खरीदने तक सीमित नहीं रहेगा। अब प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के समय लगने वाली राशि भी बढ़ जाएगी। इसके साथ ही जमीन की बढ़ी हुई सरकारी कीमतों का प्रभाव नए बनने वाले फ्लैटों और मकानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
पटना में जमीन की गणना के लिए एक कट्ठा में करीब 3.12 डिसमिल जमीन मानी जाती है और इसका क्षेत्रफल लगभग 1320 वर्ग फीट होता है। ऐसे में नई दरों के बाद बड़े प्लॉट खरीदने वालों को पहले की तुलना में काफी अधिक खर्च करना पड़ सकता है। नई सर्किल रेट व्यवस्था से सरकार को राजस्व बढ़ने की उम्मीद है, वहीं प्रॉपर्टी बाजार में खरीदारों के लिए अब बजट बनाकर निवेश करना ज्यादा जरूरी हो गया है।

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