इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। विभाग अब क्षेत्र के विकास के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार करेगा, जिसमें उद्योग, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने की योजना शामिल होगी।
7 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा
सिटी इकोनॉमिक रीजन के तहत काशी-विंध्य क्षेत्र के सात जिलों को जोड़ा जाएगा। इनमें शामिल हैं: वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, मीरजापुर, भदोही और सोनभद्र। इन जिलों को एक साथ विकसित करके एक मजबूत आर्थिक क्षेत्र बनाने की योजना है।
केंद्र और राज्य सरकार लगाएंगी निवेश
इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में करीब 5000 करोड़ रुपये की सहायता देगी। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने भी वाराणसी इकोनॉमिक रीजन के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस निवेश से क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं, उद्योग और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
उद्योग और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
योजना के तहत काशी-विंध्य क्षेत्र की खास पहचान वाले क्षेत्रों को मजबूत किया जाएगा। वाराणसी की प्रसिद्ध बनारसी साड़ी, भदोही और मीरजापुर के कालीन उद्योग, सोनभद्र की खनिज संपदा और अन्य स्थानीय उत्पादों को नई पहचान देने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही क्षेत्र को पर्यटन, शिक्षा और मेडिकल सुविधाओं के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
बेहतर कनेक्टिविटी पर रहेगा फोकस
सिटी इकोनॉमिक रीजन के तहत जिलों के बीच बेहतर सड़क नेटवर्क और परिवहन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य बड़े शहरों को आसपास के कस्बों, उद्योगों और बाजारों से जोड़ना है। इससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

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