समय पर होंगे पंचायत चुनाव
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ किया है कि बिहार में पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे। मौजूदा मुखिया और सरपंच जैसे जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक है, और उससे पहले ही नए चुनाव कराना अनिवार्य होगा। इस बयान के बाद उन सभी अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि चुनाव टाले जा सकते हैं।
आरक्षण रोस्टर पर चल रहा काम
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया तेजी से जारी है। अधिकारियों के अनुसार, इस बार कई पंचायतों में आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अनुमान है कि 4,000 से अधिक पंचायतों में आरक्षण का पुनर्गठन किया जाएगा, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
अगस्त-सितंबर में आ सकता है नोटिफिकेशन
सूत्रों के मुताबिक, राज्य निर्वाचन आयोग अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले पखवाड़े तक पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी और गांव-गांव में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।
आरक्षण बदलाव से बदलेगा राजनीतिक समीकरण
नए आरक्षण रोस्टर और सीटों के रोटेशन नियमों ने मौजूदा जनप्रतिनिधियों और दावेदारों की चिंता बढ़ा दी है। कई सामान्य सीटों के महिला, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए आरक्षित होने की संभावना है। इससे कई पुराने दिग्गज नेताओं की सीटें बदल सकती हैं।
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