जल प्रबंधन की बड़ी व्यवस्था पूरी
राज्य के जल संसाधन विभाग ने इस परियोजना के लिए बदुआ जलाशय से हर वर्ष लगभग 80 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी है। यह परमाणु बिजली घर की शुरुआती जरूरतों को पूरा करने के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। साथ ही यह शर्त भी रखी गई है कि उपयोग के बाद लगभग 22 एमसीएम रेडिएशन रहित पानी को वापस जलाशय में छोड़ा जाएगा, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे।
निर्माण और शर्तों की रूपरेखा
परियोजना को लेकर यह स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्माण के दौरान जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की होगी। इसके अलावा अतिरिक्त पानी की जरूरत पड़ने पर अलग से अनुमति लेनी होगी। किसी भी सुरक्षा या पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की स्थिति में अनुमति रद्द करने का भी प्रावधान रखा गया है।
गंगा जल से जुड़ेगा बदुआ जलाशय
बांका के इस प्रस्तावित परमाणु संयंत्र को सालभर पानी उपलब्ध कराने के लिए एक बड़ी जल योजना भी तैयार की जा रही है। इसके तहत सुल्तानगंज में गंगा नदी पर एक इनटेक संरचना बनाई जाएगी, जहां से गंगा का पानी पाइपलाइन के जरिए बदुआ जलाशय तक पहुंचाया जाएगा। तारापुर में इसके नियंत्रण के लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित करने की भी योजना है।
NTPC की भूमिका और आगे की प्रक्रिया
यह परियोजना NTPC Limited की ओर से विकसित की जा रही है। कंपनी ने इस प्रस्ताव को परमाणु ऊर्जा निगम (एटॉमिक एनर्जी कॉरपोरेशन) के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। अगले छह महीनों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होने की उम्मीद है।

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