जांच में सामने आईं बड़ी अनियमितताएं
शिक्षा विभाग के अनुसार वर्ष 2006 से 2015 के बीच हुई शिक्षक नियुक्तियों की राज्य निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा विस्तृत जांच कराई गई थी। जांच में कई मामलों में फर्जी डिग्री, जाली शैक्षणिक प्रमाणपत्र और संदिग्ध शिक्षण संस्थानों से जारी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां होने की बात सामने आई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर दोषी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
सेवा से हटाने की तैयारी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों के दस्तावेज जांच में फर्जी पाए गए हैं, उन्हें नियमों के अनुसार सेवा से बर्खास्त किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित मामलों में विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जाएगी। कई मामलों में पहले से ही प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और संबंधित शिक्षकों को आरोपी बनाया गया है।
वेतन की भी होगी वसूली
शिक्षा विभाग केवल सेवा समाप्त करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसे शिक्षकों को नौकरी के दौरान दिए गए वेतन और मानदेय की वसूली पर भी विचार कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार नियमों के तहत यह राशि ब्याज सहित वसूलने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो दोषी पाए गए शिक्षकों पर आर्थिक दायित्व भी बढ़ सकता है।
अंतिम फैसला जांच
सरकार ने संकेत दिए हैं कि प्रत्येक मामले में उपलब्ध जांच रिपोर्ट, दस्तावेजों और लागू सेवा नियमों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। दोष सिद्ध होने पर बर्खास्तगी, वेतन वसूली और कानूनी कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जबकि संबंधित शिक्षकों को नियमानुसार अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिलेगा।

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