इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
इस फोरलेन परियोजना का सबसे अधिक लाभ पटना, अरवल और औरंगाबाद जिलों के लोगों को मिलेगा। इसके अलावा दाउदनगर, ओबरा, अंबा, पलामू और गढ़वा की ओर आने-जाने वाले यात्रियों तथा मालवाहक वाहनों को भी बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी। नई सड़क व्यवस्था से यात्रा का समय घटेगा और ट्रैफिक जाम की समस्या में भी राहत मिलने की संभावना है।
बाइपास के जरिए कम होगा शहरों का ट्रैफिक
नई योजना के अनुसार नौबतपुर से अरवल तक मुख्य राजमार्ग को फोरलेन बनाया जाएगा। वहीं अरवल से औरंगाबाद के महाराजगंज तक चार बड़े फोरलेन बाइपास विकसित किए जाएंगे। इनमें अरवल, दाउदनगर, ओबरा और औरंगाबाद के बाइपास शामिल हैं। इन बाइपासों के बनने से लंबी दूरी के वाहन शहरों के अंदर प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे स्थानीय लोगों को जाम से राहत मिलेगी और शहरी क्षेत्रों में यातायात का दबाव काफी कम होगा।
औरंगाबाद बाइपास से एक्सप्रेसवे तक सीधा संपर्क
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा औरंगाबाद बाइपास माना जा रहा है। यह मार्ग भरथौली नहर के पास से शुरू होकर शहर के पश्चिमी हिस्से से गुजरते हुए अंबा के आगे भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इस कनेक्टिविटी के बाद लंबी दूरी के वाहन औरंगाबाद, रिसियप और अंबा जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में प्रवेश किए बिना सीधे एक्सप्रेसवे तक पहुंच सकेंगे। इससे माल परिवहन भी तेज होगा और ईंधन की बचत होने की संभावना है।
नई योजना धनीबार से पोला तक भी होगा फोरलेन निर्माण
नई योजना में धनीबार गांव से पोला गांव तक सड़क को भी फोरलेन बनाने का प्रस्ताव है। पोला से हरिहरगंज तक फोरलेन बाइपास का निर्माण पहले से जारी है। इसके पूरा होने पर एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहन आसानी से इस मार्ग के जरिए पलामू और गढ़वा की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
जहां बाइपास बनेगा, वहां पुरानी सड़क नहीं होगी फोरलेन
परियोजना के तहत जिन स्थानों पर नए फोरलेन बाइपास बनाए जाएंगे, वहां पुराने राजमार्ग का चौड़ीकरण नहीं किया जाएगा। बाइपास बनने के बाद पुराने मार्ग को राज्य सरकार के पथ निर्माण विभाग को सौंपने की योजना है। केवल बाइपासों के बीच के हिस्सों को फोरलेन के रूप में विकसित किया जाएगा।

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