भारत बना रहा 12,000 टन की विशाल पनडुब्बियां

नई दिल्ली। भारत समुद्री सामरिक ताकत के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठा रहा है। लंबे समय से चल रहे प्रयासों के परिणामस्वरूप अब भारतीय नौसेना परमाणु-संचालित हमलावर पनडुब्बियों (SSN) के निर्माण के बेहद उन्नत चरण में पहुंच गई है। यह प्रोजेक्ट न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि रणनीतिक संतुलन की दृष्टि से भी अत्यंत निर्णायक साबित हो सकता है।

SSN पनडुब्बियां: पारंपरिक सोच से आगे

पारंपरिक डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में SSN पनडुब्बियां एक अलग ही स्तर पर होती हैं। इनकी ताकत का मूल है इनका परमाणु रिएक्टर—जो इन्हें सतह पर आए बिना महीनों तक जल के भीतर ऑपरेशन करने की क्षमता देता है। यह उन्हें बेहद खामोश और लगातार सक्रिय रहने वाली समुद्री शक्ति बनाता है। किसी भी दुश्मन की नज़र से बचते हुए लंबे समय तक निगरानी, हमला और खुफिया अभियान चलाना इन्हीं क्षमताओं का हिस्सा है।

12,000 टन का समुद्री दानव

भारत जिन SSN पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है, उनका वजन लगभग 12,000 टन होगा। तुलना करें तो यह वजन लगभग 3,000 एशियाई हाथियों के बराबर है। यह मात्र आकार की बात नहीं है, बल्कि इस पर तैनात होने वाले हथियार, तकनीकी प्रणालियाँ और प्रोपल्शन सिस्टम भी इसे एक असाधारण युद्धपोत बनाते हैं। इन पनडुब्बियों में लगाया जाने वाला CLWR-B2 कॉम्पैक्ट लाइट वॉटर रिएक्टर 190 मेगावाट की ऊर्जा उत्पन्न करने में सक्षम होगा। साथ ही, पंप-जेट प्रोपल्शन सिस्टम इन्हें बेहद शांत और लगभग अदृश्य बना देगा, जिससे इनका पता लगाना अत्यंत कठिन हो जाएगा।

वर्टिकल लॉन्च सिस्टम: बहुआयामी क्षमता

नई SSN पनडुब्बियों में वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) की व्यवस्था होगी, जो 40 से अधिक मिसाइलों को ले जाने और दागने में सक्षम होगा। इसमें स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें और भविष्य की हाइपरसोनिक मिसाइलें तैनात की जा सकेंगी। इससे भारत को लंबी दूरी तक दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने की क्षमता मिलेगी—वो भी दुश्मन की जानकारी के बिना।

सिर्फ हमला नहीं, बहु-भूमिका की महारथी

ये पनडुब्बियां केवल हमले तक सीमित नहीं रहेंगी। ये निम्नलिखित कार्यों में भी कुशल होंगी: दुश्मन के जहाज़ों और पनडुब्बियों को ट्रैक कर नष्ट करना। समुद्र के भीतर खुफिया सूचनाएं एकत्रित करना। विशेष बलों को दुश्मन के इलाकों में गुप्त रूप से उतारना। संकट के समय आपातकालीन प्रतिकार देना। इस बहु-भूमिकात्मक क्षमता के कारण ये पनडुब्बियां रणनीतिक स्तर पर बेहद अहम भूमिका निभाएंगी।

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