भारत में बन रहे अमेरिका के लिए 'iPhone', चीन है परेशान!

नई दिल्ली। Apple द्वारा अमेरिका में बिकने वाले अधिकांश iPhone का निर्माण अब भारत में किया जाना, न केवल तकनीकी क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, बल्कि यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक निर्णायक बदलाव का संकेत भी है। यह कदम चीन की दशकों पुरानी विनिर्माण एकाधिकार स्थिति को सीधे चुनौती देता है और वैश्विक व्यापार परिदृश्य को नया रूप देता है।

भारत: उत्पादन का नया केंद्र

एप्पल के सीईओ टिम कुक ने हाल ही में पुष्टि की है कि अमेरिका में बिकने वाले अधिकतर iPhone अब भारत में बनाए जा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ उत्पादन का नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीति का हिस्सा है। भारत अब सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के रूप में Apple की योजना का अहम स्तंभ बन गया है।

Apple पहले चीन पर पूरी तरह निर्भर था, लेकिन अब भारत में Foxconn और Tata Electronics जैसे साझेदारों के माध्यम से iPhone का निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहा है। इससे भारत को उच्च तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुँचने का अवसर मिला है।

चीन की भूमिका में बदलाव

चीन लंबे समय से Apple का सबसे बड़ा विनिर्माण हब रहा है। मगर अब उसकी भूमिका घट रही है। चीन से अमेरिका के रिश्तों में आई राजनीतिक तल्खी, कोविड-19 के दौरान सप्लाई चेन में आई बाधाएँ और एकाधिकार पर बढ़ती चिंता ने Apple को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर किया। अब चीन मुख्यतः गैर-अमेरिकी बाजारों के लिए iPhone बना रहा है। इससे चीन की स्थिति Apple की आपूर्ति श्रृंखला में "पूर्ण केंद्र" से "एक भागीदार" की ओर खिसक रही है।

वियतनाम में विस्तार: एक और संकेत

Apple सिर्फ भारत पर ही नहीं, बल्कि वियतनाम जैसे अन्य देशों में भी अपने पैर जमा रहा है। MacBook, iPad और Apple Watch जैसे प्रीमियम उत्पाद अब वियतनाम में बन रहे हैं। इसका उद्देश्य सप्लाई चेन को विविध बनाना और किसी एक देश की राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता से प्रभावित न होना है।

भारत में बिक्री का नया रिकॉर्ड

निर्माण के साथ-साथ भारत में iPhone की बिक्री भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच रही है। जून तिमाही में Apple को भारत से अभूतपूर्व राजस्व मिला। दिल्ली और मुंबई में Apple के रिटेल स्टोर्स शुरू हो चुके हैं, और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या और बढ़ेगी। इससे स्पष्ट है कि Apple भारत को केवल एक उत्पादन स्थल नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक उपभोक्ता बाजार भी मानता है।

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