मर्जर और एडजस्टमेंट: दोनों एक जैसे नहीं हैं
DA मर्जर क्या होता है?
जब महंगाई भत्ते का कोई तय हिस्सा (जैसे 50%) स्थायी रूप से बेसिक पे में जोड़ दिया जाता है और आगे की सारी गणनाएं उसी बढ़े हुए बेसिक पर होती हैं. यह तरीका 5वें और 6वें वेतन आयोग में अपनाया गया था.
DA एडजस्टमेंट क्या होता है?
जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तब पुराने बेसिक और उस समय तक जमा पूरे DA को एक साथ जोड़कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है. इसके बाद DA को 0% से दोबारा शुरू किया जाता है. यही मॉडल 7वें वेतन आयोग में अपनाया गया था।
8वें वेतन आयोग में DA Zero कैसे होगा?
अब यही सवाल 8वें वेतन आयोग को लेकर उठ रहा है की भले ही अभी DA 50% या उससे ऊपर पहुंचने पर मर्ज नहीं किया जा रहा, लेकिन जब भी 8वां वेतन आयोग लागू होगा, प्रक्रिया लगभग ऐसी ही हो सकती है। हर लेवल के लिए नए बेसिक, नए सेल और नई ग्रोथ लाइन तय होगी.
पुराना बेसिक + पूरा DA = नई बेसिक
मान लीजिए उस समय DA 60–65% तक पहुंच चुका है. नया वेतन आयोग पुराने बेसिक और पूरे DA को जोड़कर, फिटमेंट फैक्टर के जरिए नई बेसिक तय करेगा। तो लागू होते ही DA होगा 0%, क्योंकि महंगाई का असर पहले ही नई बेसिक में शामिल हो चुका होगा।
कर्मचारियों को फायदा कहां होगा?
DA जीरो होने का मतलब नुकसान नहीं है. असली फायदा यहीं से शुरू होता है: बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल, HRA, TA, NPA और दूसरे भत्ते बढ़ेंगे, PF, ग्रेच्युटी और पेंशन की गणना ज्यादा बेसिक पर होगी, DA फिर से 0% से शुरू होकर हर 6 महीने में बढ़ेगा, यानी लंबी अवधि में कुल सैलरी स्ट्रक्चर मजबूत होता है।

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