अब सरकार ने इसे सस्ता, आसान और पारदर्शी बनाने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत पैतृक संपत्ति की रजिस्ट्री सिर्फ ₹10,000 में पूरी की जा सकेगी। इससे न सिर्फ खर्च कम होगा, बल्कि पारिवारिक विवादों में भी काफी कमी आएगी।
नई रजिस्ट्री व्यवस्था कैसे काम करेगी?
नई व्यवस्था के अनुसार पैतृक अचल संपत्ति के बंटवारे पर स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क में भारी छूट दी गई है। अब तीन पीढ़ियों या उससे अधिक परंपरागत वंशजों के बीच संपत्ति का विभाजन बिना झंझट किया जा सकेगा।
कुल खर्च: ₹10,000
स्टांप ड्यूटी: ₹5,000
निबंधन शुल्क: ₹5,000
इस व्यवस्था से संपत्ति की कीमत चाहे कितनी भी हो, तय शुल्क देकर रजिस्ट्री करवाई जा सकेगी।
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस में राहत
इस नई रजिस्ट्री में सबसे बड़ा लाभ स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क में लगभग 90% की कटौती है। इससे आम लोग अब खर्च के डर से रजिस्ट्री टालने की स्थिति में नहीं रहेंगे।
कौन-कौन सी संपत्तियाँ शामिल होंगी?
नई रजिस्ट्री व्यवस्था में कृषि संपत्ति, आवासीय संपत्ति और वाणिज्यिक संपत्ति सभी शामिल होंगी। इससे जमीन, मकान, दुकान या अन्य पैतृक संपत्तियों का बंटवारा कानूनी और सरल तरीके से किया जा सकेगा।
इस बड़े फैसले से सरकार का क्या है मकसद?
सरकार का उद्देश्य यह है कि पैतृक संपत्ति को लेकर चलने वाले लंबे विवाद खत्म हों। लोग समय पर कानूनी तरीके से बंटवारा कर सकें और संपत्ति का सही उपयोग हो। साथ ही यह कदम रियल एस्टेट और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा।

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