ट्रंप की नीतियों से बदली दुनिया: अमेरिका से दूरी बना रहे पुराने सहयोगी

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति और बार-बार दी जाने वाली आर्थिक धमकियों ने वैश्विक राजनीति की दिशा बदलनी शुरू कर दी है। जो देश कभी अमेरिका के सबसे भरोसेमंद साझेदार माने जाते थे, वे अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश में जुट गए हैं। यूरोप से लेकर कनाडा और ब्रिटेन तक, कई बड़े देश अब अपनी आर्थिक और रणनीतिक निर्भरता अमेरिका से हटाकर भारत और चीन जैसे उभरते पावर सेंटर्स की ओर मोड़ रहे हैं।

यूरोप का भारत की ओर झुकाव

यूरोपीय संघ और भारत के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट इस बदलते वैश्विक समीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण है। करीब दो दशकों की बातचीत के बाद हुए इस समझौते को यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने “मदर ऑफ ऑल डील” करार दिया। यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि यूरोप अब अमेरिका-केंद्रित आर्थिक ढांचे से बाहर निकलकर नए साझेदारों के साथ संतुलन बनाना चाहता है।

लैटिन अमेरिका भी भारत की तरफ

अमेरिका की टैरिफ धमकियों का असर लैटिन अमेरिकी देशों पर भी दिखने लगा है। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की भारत यात्रा इसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। ब्राजील भारत के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है, जिसके लिए बड़े स्तर पर औद्योगिक और कारोबारी बैठकों की तैयारी की गई है। यह साफ संकेत है कि अमेरिका के दबाव से बचने के लिए ब्राजील जैसे देश भी व्यापार विविधीकरण की नीति अपना रहे हैं।

ब्रिटेन का यू-टर्न: चीन से फिर नजदीकी

कभी अमेरिका के साथ मिलकर चीन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाला ब्रिटेन अब अपनी नीति में बदलाव करता नजर आ रहा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री की आठ साल बाद होने वाली चीन यात्रा इस बदलाव का प्रतीक है। ब्रिटेन की कोशिश है कि वह चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत कर अमेरिका पर अपनी निर्भरता को कम करे। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटेन को अब अमेरिका एक “अप्रत्याशित साझेदार” लगने लगा है, जिससे आर्थिक सुरक्षा को खतरा महसूस हो रहा है।

कनाडा की मजबूरी और भारत से उम्मीद

भारत और कनाडा के रिश्तों में हाल के वर्षों में तनाव देखने को मिला था, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। ट्रंप प्रशासन के दबाव और संभावित टैरिफ जोखिमों ने कनाडा को नए भरोसेमंद साझेदार तलाशने पर मजबूर कर दिया है। कनाडा भारत के साथ रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ताकि वह अपनी संप्रभुता और आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रख सके। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद इस दिशा में अहम साबित हो सकता है।

ट्रंप की टैरिफ नीति बनी बड़ी टर्निंग पॉइंट

वैश्विक राजनीति के जानकार मानते हैं कि अमेरिका से दूरी बनाने की यह प्रक्रिया पहले से चल रही थी, लेकिन ट्रंप की टैरिफ धमकियों ने इसे तेज कर दिया। अब कई देश यह मानने लगे हैं कि केवल अमेरिका पर निर्भर रहना आर्थिक और रणनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

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