पढ़ाने से पहले करनी होगी विषय की तैयारी
जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा प्रधानाध्यापकों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि शिक्षक जिस विषय को पढ़ाने वाले हैं, उसकी तैयारी उन्हें एक दिन पहले करनी होगी। इसके लिए शिक्षकों को एक विशेष डायरी में यह दर्ज करना अनिवार्य होगा कि वे अगली कक्षा में क्या पढ़ाने जा रहे हैं। खासतौर पर गणित और विज्ञान जैसे विषयों में बच्चों के सवालों के सटीक जवाब न मिल पाने की शिकायतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
पाठ-टिका के तहत शिक्षक न केवल पढ़ाने से पहले की योजना बनाएंगे, बल्कि दैनिक कार्य योजना के अनुसार पढ़ाए गए विषय का संक्षिप्त विवरण भी डायरी में दर्ज करेंगे। इससे यह स्पष्ट रहेगा कि किस तारीख को कौन-सा पाठ पढ़ाया गया और आगे की पढ़ाई कैसे आगे बढ़ेगी।
मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर निगरानी
शिक्षा विभाग ने बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों को भोजन परोसने से पहले प्रधानाध्यापक या संबंधित शिक्षक स्वयं भोजन चखेंगे। भोजन बनाने वाली जगह की साफ-सफाई, दीवारों और फर्श की नियमित सफाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी स्कूल प्रशासन की होगी। इसके अलावा ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर स्कूल में नामांकित कुल बच्चों और भोजन करने वाले बच्चों की संख्या सही-सही दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
शिक्षकों की उपस्थिति पर डिजिटल निगरानी
शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को और सख्त किया गया है। सभी शिक्षकों को पोर्टल पर फोटो के साथ उपस्थिति दर्ज करनी होगी। जिला स्तर पर रैंडम जांच की जा रही है और बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अवकाश स्वीकृति को लेकर यह भी निर्देश दिए गए हैं कि एक समय में दस प्रतिशत से अधिक शिक्षकों को छुट्टी नहीं दी जाएगी, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो। हालांकि, प्रधानाध्यापकों को यह भी कहा गया है कि आवश्यकता होने पर अवकाश स्वीकृति में अनावश्यक सख्ती न बरती जाए।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश
शिक्षा विभाग का यह कदम यह संकेत देता है कि अब सरकारी स्कूलों में सिर्फ उपस्थिति नहीं, बल्कि पढ़ाने की गुणवत्ता, बच्चों की सुरक्षा और व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा। ‘पाठ-टिका’ जैसी पहल से उम्मीद की जा रही है कि शिक्षक ज्यादा तैयारी के साथ कक्षा में जाएंगे और बच्चों की समझ व सीखने की क्षमता में सुधार होगा।

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