भारत-जर्मनी में बड़ी डिफेंस डील, चीन सन्न, पाक के उड़े होश!

नई दिल्ली। भारत और जर्मनी रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक साझेदारी करने जा रहे हैं। दोनों देश अब तक के सबसे बड़े रक्षा सौदे पर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें पनडुब्बी निर्माण का समझौता शामिल है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह डील करीब 8 अरब डॉलर की होगी और इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा करार माना जा रहा है।

इस डील की खास बात यह है कि भारत को पनडुब्बी बनाने की तकनीक भी प्राप्त होगी। यानी भारतीय नौसेना अब जर्मन तकनीक से अपनी पनडुब्बियां खुद बनाने में सक्षम होगी। वर्तमान में भारत फ्रांस से पनडुब्बियां मंगवा रहा है, लेकिन जर्मनी के साथ इस बड़े करार के बाद फ्रांस से की जाने वाली नई खरीदारी रद्द हो सकती है।

भारत में बनेगी जर्मन मॉडल पनडुब्बी

रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स और भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड मिलकर नई पनडुब्बियों का निर्माण करेंगी। भारतीय नौसेना के पास पहले से ही रूस और फ्रांस से खरीदी गई पनडुब्बियां हैं। नई पनडुब्बियां अधिक समय तक पानी के अंदर रह सकेंगी, क्योंकि इनमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम होगा, जो डीजल-इलेक्ट्रिक सिस्टम से बेहतर प्रदर्शन करता है।

जर्मन चांसलर पहली बार भारत में

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पहली बार भारत आने वाले हैं। उनका आगमन 12 जनवरी, 2026 को गुजरात के अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए होगा, इसके बाद वे बेंगलुरु का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान दोनों देश रक्षा के अलावा फार्मा और तकनीकी क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। साथ ही यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट को तेज करने की कोशिश की जाएगी।

इस डील का रणनीतिक महत्व

इस डील से भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। नई पनडुब्बियों के जरिए भारतीय नौसेना अपनी समुद्री ताकत को बढ़ाएगी और सुरक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल करेगी। चीन और पाकिस्तान के लिए यह डील चुनौतीपूर्ण संकेत भी है, क्योंकि यह न केवल भारत की समुद्री ताकत को बढ़ाएगी, बल्कि रक्षा उत्पादन में तकनीकी आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित करेगी।

0 comments:

Post a Comment