एक हफ्ते में मजदूरी देना अनिवार्य
नए कानून के तहत मजदूरों को काम पूरा होने के एक सप्ताह के भीतर मजदूरी देना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि भुगतान में देरी होती है और 15 दिन के भीतर पैसा नहीं मिलता, तो मजदूर को 0.05 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त मजदूरी ब्याज के रूप में दी जाएगी। पहले भुगतान में देरी पर श्रमिकों को कोई ठोस लाभ नहीं मिलता था, लेकिन अब लापरवाही की सीधी कीमत चुकानी होगी।
100 नहीं, अब 125 दिन का काम
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में आयोजित विशेष ग्राम सभा में इस कानून की खूबियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि अब 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी होगी, काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ते के प्रावधान को और मजबूत किया गया है, और रोजगार से जुड़े फैसलों में ग्राम सभा की भूमिका केंद्रीय होगी। गांव की जरूरत के हिसाब से तय होगा कि कौन सा काम कराया जाए, यही इस कानून की आत्मा है।
गांव के विकास पर रहेगा फोकस
‘जी राम जी’ कानून के तहत गांवों में जल संरक्षण, बुनियादी ढांचे का विकास, आजीविका से जुड़े कार्य, और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव जैसे कार्य कराए जा सकेंगे। इससे रोजगार के साथ-साथ गांवों का समग्र विकास भी सुनिश्चित होगा।
महिलाओं को मिलेगा सशक्त मंच
सरकार इस योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है। कानून में साफ प्रावधान है कि कम से कम 33 प्रतिशत काम महिलाओं को दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें मजदूरी के अलावा अन्य गतिविधियों में भी भागीदारी के अवसर मिलेंगे।
खेती के मौसम में विशेष प्रावधान
खेती के पीक सीजन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे कटाई और बुवाई के समय अधिकतम 60 दिनों तक मजदूरों को कृषि कार्यों में लगाने के लिए अधिसूचना जारी कर सकें। इससे किसानों को समय पर श्रमिक मिलेंगे और मजदूरों को गांव में ही काम मिलेगा।
मनरेगा कर्मियों का रोजगार सुरक्षित
नए कानून को लेकर मनरेगा कर्मियों में उठ रही आशंकाओं पर केंद्रीय मंत्री ने साफ किया है कि किसी भी मौजूदा कर्मी की सेवा प्रभावित नहीं होगी। अधिनियम की धारा 37(3) के तहत यह स्पष्ट है कि जो कर्मी मनरेगा को लागू कर रहे थे, वही ‘विकसित भारत – जी राम जी’ कानून को भी लागू करेंगे।
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