सरकार की योजना है कि यह नई कोचिंग नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ, यानी अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू कर दी जाए। इससे पहले भी इस नीति को लागू करने का प्रयास किया गया था, लेकिन कैबिनेट ने कुछ बिंदुओं पर संशोधन के निर्देश दिए थे। अब उन सुझावों को शामिल कर नीति को दोबारा तैयार किया गया है।
स्कूलों के पास नहीं खुलेंगे कोचिंग संस्थान
संशोधित नीति में सबसे अहम प्रावधान यह है कि कोई भी सरकारी शिक्षक किसी कोचिंग संस्थान में पढ़ा नहीं सकेगा। यदि किसी शिक्षक के कोचिंग में पढ़ाने के प्रमाण मिलते हैं तो शिक्षा विभाग साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई करेगा। इसके अलावा, किसी भी सरकारी या निजी स्कूल और शिक्षण संस्थान के आसपास कोचिंग सेंटर खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। स्कूल समय के दौरान कोचिंग चलाने पर भी पूरी तरह रोक रहेगी।
जिला स्तर पर बनेगी निगरानी समिति
नई कोचिंग नीति के तहत हर जिले में जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। यह समिति जिले में कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण और संचालन की अनुमति देगी। बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं किया जा सकेगा।
फीस को लेकर पारदर्शिता अनिवार्य
कोचिंग संस्थानों को रजिस्ट्रेशन के समय अपने सभी कोर्स की फीस का पूरा विवरण देना होगा। इसके साथ ही संस्थान परिसर में फीस से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। यदि किसी कोचिंग पर मनमानी या अत्यधिक फीस वसूली की शिकायत मिलती है, तो अधिकारियों की टीम जांच करेगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों और अभिभावकों को लाभ
सरकार का मानना है कि इस नई नीति से छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा और शिक्षा का व्यवसायीकरण रुकेगा। साथ ही सरकारी स्कूलों की पढ़ाई को नुकसान पहुंचाने वाले समानांतर कोचिंग सिस्टम पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

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