1. OPS बहाली की मांग फिर तेज
कई कर्मचारी यूनियनें लंबे समय से पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि नई पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों को भविष्य की आर्थिक सुरक्षा नहीं देती। इसी कारण 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने से पहले यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है।
2. NPS और UPS पर नाराजगी
कर्मचारी संगठनों ने National Pension System और Unified Pension Scheme दोनों को वापस लेने की मांग की है। उनका तर्क है कि इन योजनाओं में मिलने वाली पेंशन निश्चित नहीं होती, बल्कि यह बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है।
3. UPS को बहुत कम समर्थन
सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार नवंबर 2025 तक करीब 1.22 लाख कर्मचारियों ने ही UPS योजना को चुना है। जबकि केंद्र सरकार के कुल लगभग 25 लाख कर्मचारियों में से यह संख्या केवल 4–5 प्रतिशत के आसपास है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे साफ है कि कर्मचारियों को इस योजना पर भरोसा नहीं है।
4. 2004 में बंद हुई थी OPS
केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 से नए सरकारी कर्मचारियों के लिए Old Pension Scheme को बंद कर दिया था। इसके स्थान पर National Pension System लागू किया गया। OPS में पेंशन सीधे अंतिम वेतन और महंगाई भत्ते से जुड़ी होती थी, जिससे कर्मचारियों को स्थिर आय मिलती थी।
5. सरकार OPS बहाल करने के पक्ष में नहीं
केंद्र सरकार का कहना है कि OPS को फिर से लागू करना आर्थिक रूप से कठिन होगा क्योंकि इससे भविष्य में सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि NPS या UPS जैसी योजनाएं वित्तीय रूप से अधिक टिकाऊ हैं।

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