केंद्र सरकार की नई पहल, किसानों के लिए 2 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। देश में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत सरकार लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी आय का मजबूत स्रोत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में सरकार ने पशुपालकों और किसानों के लिए दो अहम योजनाओं को बढ़ावा दिया है, जिनसे उन्हें सस्ती दर पर ऋण और सब्सिडी का लाभ मिल सकेगा।

1 .पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड से मिलेगा सस्ता लोन

पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड योजना (KCC) काफी फायदेमंद साबित हो रही है। इस योजना के तहत पशुपालकों को अपने मवेशियों के चारे, दवाइयों, टीकाकरण, शेड निर्माण और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

योजना के तहत पशुपालकों को 2 लाख रुपये तक का ऋण बिना किसी जमानत के मिल सकता है, जबकि 3 लाख रुपये तक का लोन जमानत के साथ दिया जाता है। इस पर सामान्य तौर पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर लागू होती है। हालांकि अगर किसान समय पर ऋण का भुगतान कर देता है, तो उसे 3 प्रतिशत तक की अतिरिक्त ब्याज छूट मिलती है। इस तरह प्रभावी ब्याज दर घटकर लगभग 4 प्रतिशत रह जाती है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है।

पशुपालन से जुड़े कई कामों के लिए मिलेगा पैसा: इस क्रेडिट कार्ड के जरिए पशुपालक गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी और मछली पालन जैसे कामों के लिए आवश्यक पूंजी प्राप्त कर सकते हैं। इससे उन्हें साहूकारों से महंगे ब्याज पर कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती और वे अपने व्यवसाय को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं।

2 .भेड़-बकरी पालन के लिए 50 लाख तक सब्सिडी

पशुपालन को एक लाभदायक व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से सरकार ने नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) के तहत उद्यमिता योजना भी शुरू की है। इस योजना के माध्यम से भेड़ और बकरी पालन यूनिट शुरू करने के लिए भारी सब्सिडी दी जा रही है। 

इस योजना के तहत पात्र उद्यमियों को 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। यह सब्सिडी दो चरणों में दी जाती है। पहली किस्त (50%) तब जारी की जाती है जब बैंक लोन की पहली किस्त जारी हो जाती है और सरकारी एजेंसी द्वारा परियोजना का सत्यापन कर लिया जाता है। दूसरी किस्त तब दी जाती है जब परियोजना पूरी तरह स्थापित हो जाती है और उसका प्रमाणन हो जाता है।

बाकी रकम का इंतजाम ऐसे होगा: इस योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी के अलावा परियोजना की बाकी राशि का इंतजाम लाभार्थी को बैंक लोन, वित्तीय संस्थान या स्वयं की पूंजी के माध्यम से करना होता है। इन योजनाओं के जरिए गांवों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी आय का मजबूत साधन बना सकेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

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