रूस से घट रही निर्भरता
रिपोर्ट बताती है कि भारत लंबे समय से अपने रक्षा उपकरणों के लिए रूस पर निर्भर रहा है। फिलहाल भारत के कुल रक्षा आयात का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा अभी भी रूस से आता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह निर्भरता धीरे-धीरे कम होती दिख रही है। भारत अब अपने रक्षा सौदों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है और पश्चिमी देशों की ओर तेजी से रुख कर रहा है। इसी कारण फ्रांस जैसे देशों से हथियारों की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
फ्रांस बना बड़ा रक्षा साझेदार
रिपोर्ट के अनुसार 2021 से 2025 के बीच फ्रांस भारत के लिए हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है। इस अवधि में भारत ने अपने कुल आयात का लगभग 24 प्रतिशत हिस्सा फ्रांस से खरीदा। राफेल लड़ाकू विमान जैसे बड़े रक्षा सौदों के बाद भारत और फ्रांस के बीच सैन्य सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। यही कारण है कि फ्रांस के लिए भारत अब सबसे बड़ा रक्षा ग्राहक बन चुका है।
रूस के प्रमुख खरीदारों में भारत
हालांकि भारत ने अपनी रक्षा खरीद में विविधता लानी शुरू कर दी है, लेकिन रूस के लिए भारत अब भी सबसे बड़ा ग्राहक बना हुआ है। रूस से हथियार खरीदने वाले देशों में भारत पहले स्थान पर है। इसके बाद चीन और बेलारूस का स्थान आता है, जो रूस से बड़ी मात्रा में सैन्य उपकरण खरीदते हैं।
यूक्रेन बना दुनिया का सबसे बड़ा आयातक
रिपोर्ट का एक बड़ा निष्कर्ष यह भी है कि यूक्रेन अब दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है। 2021-2025 के दौरान वैश्विक हथियार आयात में यूक्रेन की हिस्सेदारी करीब 9.7 प्रतिशत रही। दिलचस्प बात यह है कि कुछ साल पहले तक यूक्रेन का वैश्विक हथियार आयात में हिस्सा बेहद कम था। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद देश को अपनी सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर हथियार खरीदने पड़े, जिससे वह सूची में सबसे ऊपर पहुंच गया।
अमेरिका दुनिया में सबसे बड़ा हथियार निर्यातक
वैश्विक रक्षा बाजार में अमेरिका का दबदबा लगातार बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में बेचे जाने वाले कुल हथियारों का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका अकेले निर्यात करता है। पिछले पांच वर्षों में अमेरिका के हथियार निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थितियों ने अमेरिकी रक्षा उद्योग की मांग को और बढ़ा दिया है।

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