लिखित परीक्षा को मिलेगा ज्यादा महत्व
नए प्रस्ताव के अनुसार चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू दोनों शामिल होंगे, लेकिन लिखित परीक्षा का महत्व अधिक रहेगा। लिखित परीक्षा – 160 अंक, इंटरव्यू – 40 अंक। इस तरह कुल 200 अंकों के आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी। चयन में लिखित परीक्षा को 80 प्रतिशत वेटेज और इंटरव्यू को 20 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा।
क्वालिफाइंग अंक भी तय किए गए हैं: सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए 45 प्रतिशत
पात्रता के लिए ये योग्यता जरूरी
असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री होना अनिवार्य होगा। आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को 5 प्रतिशत अंकों की छूट दी जाएगी। इसके अलावा उम्मीदवार के लिए नेट, एसएलइटी या सेट परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। कुछ मामलों में पीएचडी डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को भी पात्र माना जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर जारी होगा विज्ञापन
नई व्यवस्था के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए डोमिसाइल नीति लागू नहीं की जाएगी। यानी यह भर्ती पूरे देश के योग्य उम्मीदवारों के लिए खुली रहेगी। विश्वविद्यालय अपने-अपने विषयों के रिक्त पदों की जानकारी उच्च शिक्षा विभाग को भेजेंगे। इसके बाद विभाग इन पदों को एकत्रित कर आयोग को भेजेगा और उसी के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।
आयु सीमा में किया गया बदलाव
ड्राफ्ट में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आयु सीमा भी संशोधित की गई है। न्यूनतम आयु – 23 वर्ष, अधिकतम आयु – 45 वर्ष। पहले अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष तक थी, जिसे अब घटा दिया गया है। आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी।
मेरिट लिस्ट और नियुक्ति प्रक्रिया
लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के आधार पर विषयवार मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो लिखित परीक्षा में अधिक अंक पाने वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों की सूची आयोग द्वारा उच्च शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी, जिसके बाद संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति आयोग की सिफारिश के आधार पर नियुक्ति करेंगे।
जॉइनिंग और सेवा से जुड़ा नियम
नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद चयनित उम्मीदवार को एक महीने के भीतर जॉइन करना होगा। विशेष परिस्थितियों में जॉइनिंग की अवधि अधिकतम छह महीने तक बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा नियुक्ति के बाद शिक्षक को कम से कम पांच साल तक उसी विश्वविद्यालय में सेवा देना अनिवार्य होगा।
पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
राज्य सरकार का मानना है कि नई भर्ती प्रणाली लागू होने से विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और गुणवत्ता आधारित होगी। फिलहाल ड्राफ्ट पर विश्वविद्यालयों और शिक्षाविदों से सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
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