अमेरिका-रूस-चीन के बीच भारत की ताकत क्या है? हाइपरसोनिक मिसाइल पर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। आधुनिक सैन्य तकनीक की दुनिया में हाइपरसोनिक मिसाइलें सबसे उन्नत और खतरनाक हथियारों में गिनी जाती हैं। इनकी रफ्तार इतनी तेज होती है कि मौजूदा रक्षा प्रणालियों के लिए इन्हें रोकना बेहद मुश्किल माना जाता है। हाल के वर्षों में भारत ने भी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और अपनी स्वदेशी हाइपरसोनिक तकनीक के सफल परीक्षण से वैश्विक रक्षा मंच पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

दरअसल, हाइपरसोनिक मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत उनकी गति होती है। ये मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच से दस गुना तक तेज (Mach 5 या उससे अधिक) उड़ सकती हैं।

2024 में सफल परीक्षण

नवंबर 2024 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह परीक्षण डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप के पास किया गया था। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया, जिनके पास यह उन्नत तकनीक मौजूद है। इस श्रेणी में पहले से संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश शामिल हैं।

लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल

भारत जिस लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल पर काम कर रहा है, वह लगभग 1500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम मानी जा रही है। इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इसे जमीन, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों से लॉन्च किया जा सके।

भारत को HSTDV से मिली तकनीकी नींव

भारत के हाइपरसोनिक कार्यक्रम की बुनियाद हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) परियोजना से पड़ी थी। इसका सफल परीक्षण वर्ष 2020 में किया गया था। इस परियोजना ने भविष्य की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के विकास के लिए जरूरी तकनीकी आधार तैयार किया।

भारत-रूस के द्वारा ब्रह्मोस-2 पर भी काम जारी है

भारत और रूस संयुक्त रूप से ब्रह्मोस‑2 मिसाइल के विकास पर भी काम कर रहे हैं। यह एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल होगी, जो मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल से कहीं अधिक तेज और उन्नत तकनीक से लैस होने की उम्मीद है।

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