यूपी में 'शिक्षकों' के लिए सख्त फरमान, दिशा निर्देश जारी

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर निर्देश जारी किया गया है। प्रदेश के विद्यालयों में डिजिटल सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे शिक्षकों की हाजिरी अब ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।

विभाग ने जारी किया निर्देश

समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह की ओर से सभी जिला समाज कल्याण अधिकारियों को पत्र भेजकर इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए स्कूल प्रबंधन को आवश्यक डिवाइस और मोबाइल फोन की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि इस डिजिटल सिस्टम के लिए सॉफ्टवेयर पर आने वाला खर्च विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

स्कूल प्रबंधन में असंतोष

इस आदेश के बाद कई विद्यालयों के प्रबंधन ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि कई स्कूलों की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। कई जगहों पर बिजली बिल तक जमा करने में मुश्किलें होती हैं। प्रबंधकों का कहना है कि जब स्कूलों को बच्चों की यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और बैग जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए पर्याप्त सहायता नहीं मिल पा रही है, ऐसे में अतिरिक्त उपकरण खरीदने का दबाव डालना व्यावहारिक नहीं है।

एक घंटे का मिलेगा समय

नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को बायोमीट्रिक या डिजिटल उपस्थिति दर्ज करने के लिए विद्यालय शुरू होने के समय से एक घंटे का समय दिया जाएगा। यदि निर्धारित समय के भीतर उपस्थिति दर्ज नहीं होती है तो सिस्टम अपने आप लॉक हो जाएगा। जहां नेटवर्क की समस्या होगी, वहां ऑफलाइन मोड में उपस्थिति दर्ज की जाएगी। बाद में इंटरनेट उपलब्ध होने पर यह डेटा ऑनलाइन सिस्टम में अपडेट हो जाएगा।

प्रधानाध्यापक की होगी जिम्मेदारी

ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की जिम्मेदारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक की होगी। यदि किसी कारणवश प्रधानाध्यापक यह कार्य करने में असमर्थ होते हैं तो उन्हें अपना चार्ज किसी अन्य शिक्षक को देना होगा, जो यह जिम्मेदारी संभालेगा।

आदेश के बावजूद शुरू नहीं हुई व्यवस्था

हालांकि विभाग की ओर से 31 जनवरी तक ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तीन सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश स्कूलों में अभी तक पुरानी व्यवस्था ही चल रही है। स्कूलों में अभी भी शिक्षकों की हाजिरी रजिस्टर पर ही दर्ज की जा रही है। विभाग ने समय पर व्यवस्था लागू न करने पर वेतन रोकने तक की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद कई स्कूल प्रबंधन इस आदेश को लागू करने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।

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