यह सर्वे देशभर के लाखों लोगों पर आधारित है। लगभग 2.7 लाख घरों और 11 लाख से अधिक व्यक्तियों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे यह रिपोर्ट काफी व्यापक और विश्वसनीय मानी जा रही है।
बेरोजगारी दर में गिरावट: राहत की पहली खबर
रिपोर्ट के अनुसार, 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए बेरोजगारी दर घटकर 3.1% रह गई है, जो पिछले वर्ष 3.2% थी। यह गिरावट भले ही मामूली लगे, लेकिन यह लगातार सुधार का संकेत देती है। पुरुषों की बेरोजगारी दर 3.3% से घटकर 3.1% हो गई है, जबकि महिलाओं के लिए यह 3.1% पर स्थिर बनी हुई है। यह दर्शाता है कि रोजगार के अवसरों में धीरे-धीरे संतुलन बन रहा है।
ग्रामीण-शहरी अंतर भी हुआ साफ
ग्रामीण भारत में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर नजर आई है। यहां बेरोजगारी दर घटकर 2.4% हो गई है। खास बात यह है कि ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर सिर्फ 2.1% रही, जो पुरुषों (2.6%) से भी कम है। वहीं शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर थोड़ी अधिक है, पुरुषों के लिए 4.2% और महिलाओं के लिए 6.4%। इससे यह स्पष्ट होता है कि शहरों में रोजगार के लिए प्रतिस्पर्धा अधिक है।
रोजगार की गुणवत्ता में सुधार
रिपोर्ट की दूसरी बड़ी खासियत यह है कि रोजगार की प्रकृति में बदलाव आया है। स्वरोजगार (Self-employment) की हिस्सेदारी 57.5% से घटकर 56.2% हुई हैं, जबकि नियमित वेतनभोगी नौकरियों का हिस्सा 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गया है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि देश में औपचारिक नौकरियों की संख्या बढ़ रही है, जो स्थिर आय और बेहतर सुरक्षा प्रदान करती हैं।
आय में बढ़ोतरी: दूसरी बड़ी खुशखबरी
कामगारों की आय में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नियमित वेतनभोगी पुरुषों की औसत आय बढ़कर ₹24,217 हो गई, जबकि महिलाओं की आय 7.2% बढ़कर ₹18,353 तक पहुंच गई। स्वरोजगार करने वालों की आय में भी अच्छा इजाफा देखा गया है, खासकर महिलाओं की आय में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि सिर्फ रोजगार ही नहीं, बल्कि कमाई की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है।

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