बंगाल चुनाव के लिए बीजेपी की पहली सूची जारी, कई बड़े चेहरों को मिला टिकट

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आगामी चुनाव के लिए 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में कई बड़े नेताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी चुनावी मैदान में उतारा गया है।

सबसे ज्यादा चर्चा शुवेंदु अधिकारी के नाम को लेकर हो रही है, जिन्हें पार्टी ने भवानीपुर की हाई-प्रोफाइल सीट से उम्मीदवार बनाया है। यह वही सीट है जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ती रही हैं। इसके साथ ही शुवेंदु अधिकारी को उनकी पारंपरिक सीट नंदीग्राम से भी टिकट दिया गया है।

बड़े नेताओं को मिला मौका

बीजेपी की पहली सूची में कई प्रमुख नेताओं को टिकट दिया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष को खड़गपुर सदर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं अभिनेता रुद्रनिल घोष को शिवपुर से मैदान में उतारा गया है।  इसके अलावा भाटपारा सीट से पूर्व सांसद अर्जुन सिंह के बेटे पवन सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं अग्निमित्रा पाल को आसनसोल दक्षिण सीट से टिकट मिला है। सूची में फासीदेवा से दुर्गा मुर्मू और तारकेश्वर से शांतनु पान के नाम भी शामिल हैं।

ममता बनर्जी को सीधी चुनौती

शुवेंदु अधिकारी का नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ना राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नंदीग्राम सीट का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में शुवेंदु अधिकारी ने यहीं से ममता बनर्जी को हराया था।

वहीं भवानीपुर सीट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। इसी सीट से उन्होंने 2021 में उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी। ऐसे में इन दोनों सीटों से चुनाव लड़कर शुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को कड़ी चुनौती देने की रणनीति अपनाई है।

क्रिकेटर अशोक डिंडा को भी टिकट

बीजेपी ने इस बार राजनीति के साथ खेल जगत के चेहरे पर भी भरोसा जताया है। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अशोक डिंडा को मोयना विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। क्रिकेट के मैदान पर अपनी तेज गेंदबाजी के लिए पहचाने जाने वाले डिंडा अब राजनीति में नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।

महिला उम्मीदवारों को भी मिला मौका

बीजेपी की इस पहली सूची में 10 महिला उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है। पार्टी का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा गया है।

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