आयोग के अनुसार लगभग 3.53 लाख उपभोक्ताओं से करीब 127.85 करोड़ रुपये अधिक वसूले गए थे। अब यह रकम अप्रैल से जुलाई के बीच आने वाले बिजली बिलों में समायोजित की जाएगी।
बिना अनुमति तय कर दी गई थी मीटर की कीमत
मामला तब सामने आया जब बिजली निगम प्रबंधन ने आयोग की अनुमति के बिना ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत तय कर दी थी। पिछले वर्ष नौ सितंबर को जारी आदेश के अनुसार सिंगल फेज कनेक्शन के लिए 6016 रुपये और थ्री फेज कनेक्शन के लिए 11,341 रुपये वसूले जा रहे थे। बाद में आयोग ने नई कास्ट डाटा बुक लागू की, जिसमें सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत 2800 रुपये और थ्री फेज मीटर की कीमत 4100 रुपये तय की गई।
लाखों उपभोक्ताओं से हुई अतिरिक्त वसूली
नई दरों के लागू होने से पहले दिए गए लगभग 3,53,357 नए बिजली कनेक्शनों में उपभोक्ताओं से तय कीमत से कहीं ज्यादा पैसा लिया गया। आंकड़ों के अनुसार सिंगल फेज मीटर पर लगभग 3216 रुपये और थ्री फेज मीटर पर करीब 7241 रुपये तक अधिक वसूली की गई थी। इसी मुद्दे को लेकर Uttar Pradesh State Electricity Consumers Council ने आयोग में अवमानना याचिका दाखिल की थी और अतिरिक्त वसूली पर रोक लगाने की मांग की थी।
आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
आयोग ने बिजली कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच सभी प्रभावित उपभोक्ताओं के बिल में अतिरिक्त राशि समायोजित की जाए। साथ ही 31 जुलाई तक समायोजन की पूरी रिपोर्ट भी आयोग को सौंपने को कहा गया है। इसके अलावा मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त को बिजली निगम के निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उपभोक्ताओं को फायदा
उपभोक्ता परिषद के अनुसार कुल कनेक्शनों में लगभग 10 प्रतिशत थ्री फेज कनेक्शन शामिल हैं। इस आधार पर बिजली कंपनियों को करीब 127.85 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं को वापस करने होंगे। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से लाखों बिजली उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलेगी और भविष्य में बिजली कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए भी मजबूर होना पड़ेगा।
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