केरल से शुरू होकर बिहार तक पहुंचता है मानसून
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मानसून की शुरुआत सबसे पहले केरल में होती है, जहां यह सामान्यतः 1 जून के आसपास पहुंचता है। इस बार इसके 25 से 27 मई के बीच केरल में पहुंचने के आसार हैं। इसके बाद यह धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ते हुए बिहार तक पहुंचता है। यहां मानसून सीमांचल क्षेत्र किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और सुपौल से प्रवेश करता है और फिर धीरे-धीरे पटना समेत अन्य जिलों में फैलता है।
बारिश का पैटर्न और चिंता
हाल के वर्षों में बिहार में मानसून की बारिश का पैटर्न असमान और कमजोर होता देखा गया है। राज्य में सामान्य वार्षिक वर्षा का औसत लगभग 992.2 मिमी है, लेकिन कई वर्षों में यह औसत से कम दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार भी जून-जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। इसका असर खेती-किसानी और जल संचयन पर पड़ सकता है। खासकर दक्षिण और पश्चिम बिहार के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति की चिंता जताई जा रही है।
जलवायु परिवर्तन का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम पैटर्न और जलवायु परिवर्तन का सीधा असर मानसून पर पड़ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता, हवा में नमी का उतार-चढ़ाव और वैश्विक मौसमी घटनाएं जैसे ला नीना की कमजोरी भी वर्षा के वितरण को प्रभावित कर रही हैं। इसी कारण कुछ जिलों में अत्यधिक बारिश तो कुछ में सामान्य से काफी कम वर्षा देखने को मिल रही है।
पिछले वर्षों का रिकॉर्ड
पिछले कुछ वर्षों में भी बिहार में मानसून का व्यवहार असमान रहा है। 2019, 2020 और 2021 में राज्य में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बाद कई जिलों में बारिश में गिरावट देखी गई। 2025 के मानसून सीजन में भी मौसम विभाग ने औसत से कम बारिश की संभावना जताई है, जिससे कृषि क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।
प्री-मानसून गतिविधियां
मई महीने में राज्य में आंधी-तूफान और वज्रपात की घटनाएं भी बढ़ी हैं। कई जिलों में आंधी-पानी और बिजली गिरने से जनहानि की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि बारिश ने कुछ हद तक गर्मी से राहत भी दी है और मौसम को सुहावना बनाया है।

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