भारत-रूस की बड़ी साझेदारी, मिलकर निकालेंगे खजाना, चीन की बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली। भारत और रूस जल्द ही एक ऐसी रणनीतिक साझेदारी करने जा रहे हैं, जिसका असर वैश्विक खनिज बाजार पर देखने को मिल सकता है। दोनों देश रेयर अर्थ और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, प्रोसेसिंग और तकनीकी सहयोग को लेकर एक बड़े समझौते की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दो महीनों के भीतर इस डील पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भर में इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रेयर मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत का लक्ष्य इन खनिजों की सप्लाई को सुरक्षित करना और चीन पर निर्भरता कम करना है।

लिथियम और रेयर अर्थ पर रहेगा फोकस

भारत और रूस के बीच प्रस्तावित समझौता मुख्य रूप से लिथियम और रेयर अर्थ मिनरल्स पर केंद्रित होगा। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, सोलर पैनल, विंड टर्बाइन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में बेहद अहम माने जाते हैं। भारत सरकार पहले ही इस समझौते का ड्राफ्ट रूस को भेज चुकी है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, खनिज खोज और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने को लेकर चर्चा जारी है।

चीन की पकड़ कम करने की तैयारी

वर्तमान में चीन दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई और प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी में सबसे आगे है। कई देशों की तरह भारत भी इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में रूस के साथ साझेदारी भारत के लिए एक वैकल्पिक और मजबूत सप्लाई चेन तैयार कर सकती है। 

रूस के पास है विशाल खनिज भंडार

रूस के पास रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार मौजूद है। रूस के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में करोड़ों मीट्रिक टन रेयर मेटल्स मौजूद हैं। हालांकि, रूस के पास इन खनिजों की आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीक और बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता अभी सीमित है। इसी वजह से भारत और रूस की साझेदारी दोनों देशों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?

भारत तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में लिथियम और रेयर अर्थ जैसे खनिज भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जा रहे हैं। रूस के साथ यह साझेदारी भारत को न केवल कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, बल्कि नई तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति भी दिला सकती है।

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