सरकार आधुनिक तकनीक की मदद से शहरी आबादी क्षेत्र की सभी संपत्तियों का डाटा तैयार करेगी। इस सर्वे में संपत्ति का क्षेत्रफल, मालिक का नाम, पता, उपयोग, सीमांकन और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज होगी। साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि किसी व्यक्ति के नाम पर कितनी संपत्तियां हैं।
एक क्लिक पर मिलेगी पूरी जानकारी
डिजिटल रिकॉर्ड बनने के बाद संपत्तियों से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी। इससे सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनेगा और जरूरत पड़ने पर किसी भी संपत्ति की जानकारी तुरंत निकाली जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से खरीद-फरोख्त में होने वाले फर्जी दस्तावेजों और बेनामी संपत्तियों की पहचान आसान होगी। साथ ही गलत सीमांकन और अवैध कब्जों पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
विकास कार्यों में भी मिलेगा फायदा
यह सर्वे केवल रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरों के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। सड़क चौड़ीकरण, सीवर लाइन, जल निकासी, नगर नियोजन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की योजना बनाने में यह डेटा उपयोगी साबित होगा। अधिकारियों के अनुसार, सटीक डिजिटल नक्शे और संपत्ति रिकॉर्ड उपलब्ध होने से विकास योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सकेगा।
नियमावली और SOP की प्रक्रिया शुरू
इस परियोजना को लागू करने के लिए सरकार नियमावली और एसओपी तैयार कर रही है। राजस्व परिषद लगातार संबंधित विभागों के साथ बैठकें कर रही है। हाल ही में नगर विकास विभाग, आवास विकास और एलडीए के अधिकारियों के साथ भी इस विषय पर चर्चा की गई। माना जा रहा है कि तैयारी पूरी होते ही जमीनी स्तर पर सर्वे का काम शुरू कर दिया जाएगा।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
जमीन और मकान विवाद कम होंगे
फर्जी रजिस्ट्री और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
संपत्ति का रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध होगा।
बेनामी संपत्तियों की पहचान आसान होगी।
सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में तेजी आएगी।

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