योगी सरकार की बड़ी तैयारी: यूपी के सभी जिलों में होंगे लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार अब ईंधन बचत और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बड़े स्तर पर नई रणनीति तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के बड़े औद्योगिक संस्थानों, आईटी कंपनियों और स्टार्टअप्स में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा में भी डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू हो गई है।

सरकार का मानना है कि अगर कार्यालयों में आने-जाने की संख्या कम होगी तो ईंधन की खपत घटेगी और ट्रैफिक दबाव भी कम होगा। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

बड़े संस्थानों के लिए नया सुझाव

प्रस्ताव के अनुसार जिन संस्थानों में 50 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं, वहां सप्ताह में दो दिन कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जा सकती है। सरकार का उद्देश्य रोजाना होने वाली लंबी यात्रा को कम करना है, जिससे पेट्रोल और डीजल की बचत हो सके। इसके अलावा सरकारी बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में आयोजित करने पर जोर दिया गया है। सचिवालय स्तर की कई बैठकों को वर्चुअल मोड में करने की तैयारी है।

‘नो व्हीकल डे’ का प्रस्ताव

सरकार ने मंत्रियों और अधिकारियों के काफिलों में भी कमी लाने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के तहत सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या घटाई जा सकती है। साथ ही सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है। इस पहल के जरिए लोगों को सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।

ऑनलाइन पढ़ाई को बढ़ावा

शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार डिजिटल मॉडल को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी (SIET) के सहयोग से छात्रों के लिए रिकॉर्डेड लेक्चर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। छात्र मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी चैनलों के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे स्कूल आने-जाने में लगने वाला समय और खर्च दोनों कम होंगे।

क्या होगी ईंधन की बचत?

विशेषज्ञों का कहना है कि नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में इस योजना का असर ज्यादा दिखाई दे सकता है। इन शहरों में बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों से लंबी दूरी तय कर ऑफिस पहुंचते हैं। यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी सप्ताह में दो दिन घर से काम करते हैं तो लाखों लीटर ईंधन की बचत संभव है। इससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है।

हाइब्रिड मॉडल पर जोर

विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम के बजाय हाइब्रिड मॉडल ज्यादा प्रभावी हो सकता है। यानी जरूरत के अनुसार कुछ दिन ऑफिस और कुछ दिन घर से काम करने की व्यवस्था अपनाई जाए। अगर सरकार इस योजना को सही तरीके से लागू कर पाती है तो इससे ईंधन बचत, ट्रैफिक नियंत्रण और प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन कार्य प्रणाली को भी नई दिशा मिल सकती है।

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